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Bilaspur News: मोटर साइकिल हादसे में घायल व्यक्ति को 81,314 रुपये का मुआवजा

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अदालत से
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कोर्ट ने वाहन मालिक को ठहराया हादसे के लिए जिम्मेदार

मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल, घुमारवीं ने सुनाया फैसला
रजिस्ट्रेशन में रिकॉर्ड वाहन मालिक करेगा मुआवजे की भरपाई

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मोटर साइकिल दुर्घटना में घायल व्यक्ति को डॉ. मोहित बंसल, अध्यक्ष, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल, घुमारवीं कैंप बिलासपुर ने 81,314 रुपये का मुआवजा दिया है। यह दुर्घटना 28 जुलाई 2018 को जाबली के समीप सुकुमार सर्विस स्टेशन के पास हुई थी। अध्यक्ष, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने कहा कि वाहन मालिक का रिकॉर्ड रजिस्टर्ड होना तय करता है कि वह तीसरे पक्ष के हर्जाने के लिए जिम्मेदार रहेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिक्री या नॉन-रजिस्ट्रेशन वाहन मालिक की जिम्मेदारी को कम नहीं करती। इस निर्णय से हाइलाइट हुआ कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत पीड़ितों को न्याय दिलाना प्राथमिकता है और रजिस्टर्ड मालिक को तीसरे पक्ष के हर्जाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। बता दें कि घटना के समय पीड़ित अपने सहकर्मी के साथ मोटर साइकिल पर जा रहे थे, तभी दूसरी तरफ से आ रही गाड़ी उनकी मोटरसाइकिल से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कराया गया। इसके बाद उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ और आरएच मंडी में इलाज जारी रखा। जिस गाड़ी से टक्कर हुई वो किसी और व्यक्ति के नाम से पंजीकृत थी, जबकि गाड़ी पर किसी और का दावा था। चालक हादसे के समय वाहन चला रहा था। ट्रिब्यूनल ने पाया कि दुर्घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई। पीड़ित ने दावा किया कि उन्हें चोटों के कारण मानसिक और शारीरिक पीड़ा हुई, आंख की दृष्टि कमजोर हुई और स्थायी सिरदर्द का सामना करना पड़ा। कुल इलाज और अन्य खर्चों का दावा 3,00,000 रुपये से अधिक था।
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वाहन मालिक का तर्क था कि वाहन पहले ही बेच दिया गया था और इस हादसे के लिए अब वाहन का दावेदार जिम्मेदार है। ट्रिब्यूनल ने निर्णय दिया कि वाहन का रजिस्टर्ड मालिक ही कानूनी रूप से जिम्मेदार है, चाहे वाहन की बिक्री हो गई हो। पीड़ित को को 81,314 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दायर की तारीख से लेकर मुआवजा राशि की अदायगी तक लगाया जाएगा। हादसे में हुए खर्च, दर्द-सहायता, विशेष आहार और दैनिक मजदूरी का हर्जाना शामिल किया गया।
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