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मार्कंडेय-शिमला बस रूट बंद होने से यात्री परेशान

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बिलासपुर। मार्कंडेय-शिमला बस रूट बंद होने से मंदिर में माथा टेकने आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के राष्ट्रीय संयोजक रजनीश शर्मा और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरएम बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा और बस रूट को बहाल करने की मांग उठाई।
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रजनीश शर्मा ने कहा कि बस रूट बंद होने से लगभग 50 से अधिक गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महाऋषि मार्कंडेय मंदिर में दूर-दूर से लोग स्नान करने और माथा टेकने आते हैं। क्षेत्र की जनता की मांग पर बस रूट शुरू करवाया गया था। इसको किसी भी सूरत में बंद नहीं होने दिया जाएगा। शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शिमला जाने के लिए टैक्सी का उपयोग करना पड़ रहा है। यह बस सेवा दावीं घाटी के साथ-साथ लगभग 50 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को राजधानी शिमला और आईजीएमसी पहुंचाने के लिए लाइफ लाइन का कार्य करती है।
शर्मा ने कहा कि इस बस रूट को महज इस आधार पर बंद कर दिया गया है कि इस बस को सवारियां नहीं मिल रहीं। इससे यह रूट घाटे में जा रहा है। कहा कि लॉकडाउन की वजह से धार्मिक मंदिर बंद थे, इसलिए मंदिर में लोग नहीं आ रहे थे। अब सरकार ने मंदिर खोल दिए हैं। लोगों ने मार्कंडेय मंदिर आना शुरू कर दिया है। दूरदराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु मंदिर आ रहे हैं। दावीं घाटी, नेरी, सिकरोहा, मलोखर, मलोथी, नवगांव, सूईं सुरहाड़, साई खारसी, बैरी, पंजगार्इं, रानी कोटला आदि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और श्रद्धालु बस सेवा बंद होने से परेशान हैं।
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आरएम बिलासपुर केएल यादव ने कहा कि लोगों की समस्याओं से अवगत हैं। इसका समाधान किया जाएगा।
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