बिलासपुर। एनीमिया एक रोग है। इसमें खून में मौजूद लाल रक्त कणों में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने वीरवार को कही।
एनीमिया को लेकर लोगों को जागरूक करने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि खून की कमी यानी एनीमिया को खत्म करने के लिए स्कूलों में बिप्स कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इसमें 6 वर्ष से 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए गुलाबी रंग की गोली, 11 वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों के लिए नीली गोली सप्ताह में एक बार दी जाती है। गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए लाल रंग की गोली दी जाती है। यह हीमोग्लोबिन बढ़ाने का काम करती है।
ज्यादातर लोहे और आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। भोजन में पौष्टिक तत्वों लौह या आयरन विटामिन लवणों, प्रोटीन की कमी, पेट के कीड़े, मलेरिया तथा क्षय रोग आदि से शरीर में खून का कम बनना, आंतों में अल्सर, महिलाओं में अधिक माहवारी आना, दुर्घटना आदि में चोट लगने पर खून बहने के कारण एनीमिया हो जाता है।
बताया कि इस रोग से सबसे अधिक चार माह से छह वर्ष के बच्चे, 11 वर्ष से 18 वर्ष की किशोरियां, गर्भवती तथा दूध पिलाने वाली माताएं अधिक प्रभावित होती हैं। सीएमओ ने कहा कि बच्चों में खून की कमी होने पर उनका वजन और लंबाई नहीं बढ़ती, बच्चा पढ़ाई में कमजोर होता है तथा उसे संक्रामक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
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ये हैं एनीमिया के लक्षण
त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों एवं पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट, चक्कर आना, विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में बेहोश होना, सांस फूलना, हृदय गति का तेज होना तथा चेहरे एवं पैरों पर सूजन दिखाई देना।
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यह लें भोजन
गर्भवती माताओं को हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, चुकंदर, लहसुन आंवला, नींबू, संतरा, चने, मटर आदि का सेवन करना चाहिए। उपचार तथा रोकथाम के लिए अगर एनीमिया मलेरिया, परजीवी कीटों के काटने से है, तो पहले इसका इलाज करें। लौह तत्व युक्त चीजों का सेवन करें। विटामिन ए एवं सी युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।
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