फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल प्रदेश: हल्दी-जिमीकंद ने बढ़ाई बिलासपुर के चार भाइयों की कमाई, प्राकृतिक खेती से लाखों का कारोबार

Sun, 13 Sep 2026 01:21 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

बिलासपुर के करोट गांव के चार भाइयों ने प्राकृतिक खेती से कमाई की नई मिसाल पेश की है। गेहूं-मक्की के साथ हल्दी और जिमीकंद की खेती कर परिवार अच्छी आमदनी कर रहा है। इस वर्ष 20 क्विंटल हल्दी से करीब दो लाख रुपये का कारोबार हुआ, जबकि काली हल्दी को 300 रुपये किलो तक दाम मिला। एमएसपी बढ़ने से किसानों का भरोसा भी बढ़ा है।
विज्ञापन
हल्दी, जिमीकंद से लाखों की कमाई। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसान अब गेहूं, मक्की और धान जैसी पारंपरिक फसलों के साथ नकदी फसलों से भी अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। करोट गांव के प्रेम ठाकुर और उनके तीन भाई श्याम लाल ठाकुर, मस्तराम ठाकुर तथा छोटा राम ने हल्दी और जिमीकंद को कमाई का जरिया बनाया है। परिवार हर साल हल्दी से करीब दो लाख रुपये का कारोबार कर रहा है, जबकि जिमीकंद का उत्पादन भी 50 से 60 क्विंटल तक पहुंच रहा है।
विज्ञापन


प्रेम ठाकुर पिछले तीन-चार वर्षों से प्राकृतिक तरीके से हल्दी की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 20 क्विंटल प्राकृतिक हल्दी तैयार की। इसमें से छह क्विंटल हल्दी जिला आत्मा परियोजना के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई। शेष हल्दी भी आसपास के लोगों ने इसी दर पर खरीदी। इस तरह हल्दी से करीब दो लाख रुपये का कारोबार हुआ। परिवार हर साल औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहा है।

विज्ञापन


ठाकुर परिवार काली हल्दी की खेती भी कर रहा है। इस वर्ष करीब डेढ़ क्विंटल काली हल्दी तैयार हुई, जिसे 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक का दाम मिला। औषधीय गुणों के चलते काली हल्दी की मांग अच्छी है। अब परिवार मेघालय की लकाडोंग हल्दी की खेती की ओर भी बढ़ रहा है। इसमें सामान्य हल्दी की अपेक्षा करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है।

परिवार करीब तीन बीघा भूमि में जिमीकंद की खेती कर रहा है। हर साल 50 से 60 क्विंटल जिमीकंद का उत्पादन होता है। प्रदेश के बाहर इसकी बिक्री 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम पर हो रही है। परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है। लगातार बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के कारण इसकी पहचान प्रदेश से बाहर तक बनी है।

श्याम लाल ठाकुर को वर्ष 2003 में प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की ओर से कृषि दूत सम्मान मिला था। वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। परिवार की बैलों की जोड़ी को बिलासपुर के नलवाड़ी मेले में भी कई वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिल चुका है।

प्रेम ठाकुर ने बताया कि आत्मा परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण मिला। इसके अलावा महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मेहनत अधिक है, लेकिन फसल की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाले दाम किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
विज्ञापन

एमएसपी से किसानों का भरोसा बढ़ा
प्रेम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने प्राकृतिक हल्दी का एमएसपी 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्राकृतिक गेहूं का एमएसपी 60 से बढ़ाकर 80 रुपये और मक्की का 40 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। कच्ची हल्दी का एमएसपी 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अलावा पहली बार अदरक का एमएसपी भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है।

उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि आत्मा परियोजना के माध्यम से इस वर्ष जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले 136 किसानों से करीब 183 क्विंटल गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की गई है। मक्की की खरीद 60 रुपये और हल्दी की खरीद 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाएगी।

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राकृतिक तरीके से उत्पादित फसलों का किसानों को सरकार की ओर से निर्धारित एमएसपी के अनुसार उचित मूल्य मिले। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूत होने के साथ लोगों को रसायनरहित और पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें