प्रति वर्ष 1.55 से कम फसल चक्र लेने वाले जिलों को पीएम धन धान्य योजना में किया शामिल
प्रदेश में एसओपी को पूरा करने वाला एकमात्र जिला बना है बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के शुभारंभ पर जिला स्तरीय कार्यक्रम किसान भवन में हुआ। कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि कर ग्रामीण समृद्धि को सुनिश्चित करना है।
मंत्री धर्माणी ने याद किया कि भाखड़ा बांध के निर्माण ने देश में बिजली उत्पादन और हरित क्रांति की नींव रखी थी। बिलासपुर उस परिवर्तन का साक्षी रहा है। अब प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत बिलासपुर को मॉडल कृषि जिला के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा, ताकि यहां की भौगोलिक व प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को अधिक उत्पादन और आय का अवसर मिले। मंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों को चयनित किया गया है, जिनमें बिलासपुर जिला हिमाचल का एकमात्र जिला है। योजना में ऐसे जिलों को शामिल किया गया है, जहां फसल की औसत उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से कम है, किसान क्रेडिट कार्ड की पहुंच सीमित है, जहां प्रति वर्ष 1.55 से कम फसल चक्र लिए जाते हैं।
इस अवसर पर पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, एपीएमसी चेयरमैन सतपाल वर्धन, निदेशक कृषि विभाग रविंद्र सिंह जसरोटिया, एडीसी बिलासपुर ओमकांत ठाकुर, कृषि विशेषज्ञों और कृषक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किसानों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को लाइव सुना और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं को लेकर उत्साह व्यक्त किया।
इनसेट
किसानों को सरकार दिला रही उचित मूल्य
कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए गेहूं, मक्की, हल्दी और जौ के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाया है। अब गेहूं का एमएसपी 60 रुपये प्रति किलो, मक्की का 40 रुपये, कच्ची हल्दी का 90 रुपये और पांगी क्षेत्र में जौ का 60 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। मंत्री ने कहा कि 20 से 30 साल पहले गांव आत्मनिर्भर हुआ करते थे। अधिकांश आवश्यकताएं स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती थीं, लेकिन धीरे-धीरे पारंपरिक कृषि और घरेलू उत्पादन में कमी आई। आज जरूरत है कि युवा कृषि, पशुपालन और ग्रामीण उद्योगों की ओर लौटें, ताकि स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सके।