शाहतलाई बाबा बालक नाथ मंदिर में सदियों पुराना वट वृक्ष।
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शाहतलाई (बिलासपुर)। बाबा बालक नाथ की तपोस्थली शाहतलाई में प्राचीन काल की दो ऐतिहासिक धरोहरें वट वृक्ष और गुरना पेड़ हैं। इनसे लाखों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। इन ऐतिहासिक धरोहर की खास बात यह है कि प्राचीन काल से सालभर हरेभरे रहते हैं।
शाहतलाई में स्थित गुरना पेड़ का विशेष धार्मिक महत्व है। गुरना पेड़ का दर्शन किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार बाबा बालक नाथ ने माई रतनो का धर्म पुत्र बनकर 12 वर्ष गायें चराई थीं। चरण गंगा के किनारे स्थित गुरने की छाया में बैठकर तपस्या की थी। गुरना पेड़ आज भी उसी तरह हराभरा है। माना जाता है कि गुरना पेड़ के तने में डोरी बांधने से हर मनोकामना पूरी होती है। जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो श्रद्धालु उस डोरी को खोल देते हैं। इतना ही नहीं श्रद्धालु गुरने के पत्तों को तोड़कर प्रसाद के रूप में घर ले जाते थे। इससे गुरने का अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा था। इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए मंदिर न्यास ने गुरने के तने के चारों ओर लोहे की ऊंची ग्रील लगा दी है। अब श्रद्धालु ग्रील पर ही डोरी बांधकर मन्नतें मांगते हैं।
उधर, मंदिर न्यासी विजय शर्मा ने बताया कि शाहतलाई में प्राचीन काल से एक गुरने का पेड़ है जो सदा हराभर रहता है। मान्यता है कि बाबा बालकनाथ ने इस गुरने के नीचे बैठकर तपस्या की थी। उन्होंने बताया कि इस धरोहर को जीवत रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने एक कर्मचारी को साफ-सफाई और सिंचाई के लिए नियुक्त किया है।
बाबा बालक नाथ की तपोस्थली शाहतलाई में ऐतिहासिक धरोहर गुरना पेड़।- फोटो : BILASPUR