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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन अधिग्रहण में अनियमितताओं का आरोप

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भूमि रिकॉर्ड में त्रुटियों को लेकर प्रभावितों ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
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रिकॉर्ड दुरुस्त होने तक फोरलेन निर्माण और राजस्व कार्रवाई रोकने की मांग
भाखड़ा विस्थापितों की नौतोड़ भूमि पर कार्रवाई पर रोक का आग्रह
इंतकाल, ततिमाजात में गड़बड़ियों की शिकायत
कहा, 100 वर्ष पुराना है बंदोबस्त, दोबारा सर्वेक्षण की आवश्यकता

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रभावितों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अधिग्रहित भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में त्रुटियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही जब तक सभी कमियां दुरुस्त नहीं हो जातीं, तब तक सड़क निर्माण और संबंधित सभी राजस्व कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया गया है।
ज्ञापन में भाखड़ा बांध से विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से आवंटित नौतोड़ भूमि का उल्लेख किया है। आरोप है कि इस भूमि का राजस्व रिकॉर्ड मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। प्रभावितों ने मांग की है कि नौतोड़ भूमि पर किसी भी प्रकार की राजस्व कार्यवाही, जैसे तकसीम, निशानदेही, पंजीकरण, भूमि मालकान तब्दीली, मलकीयत का केंद्र या राज्य सरकार के पक्ष में हस्तांतरण पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए।
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समिति ने ज्ञापन में बताया कि जिला बिलासपुर में भूमि बंदोबस्त हुए लगभग 100 वर्ष बीत चुके हैं। नियमों के अनुसार 40 वर्ष बाद दोबारा बंदोबस्त अनिवार्य है। आरोप है कि फोरलेन अधिग्रहण से जुड़े इंतकालों के साथ संलग्न ततिमाजात में कई करूकान दर्ज ही नहीं किए गए। कई करूकान, जिन्हें विभाजित होकर अलग-अलग दर्ज होना चाहिए था, उनका विभाजन नहीं किया गया। कुछ प्रविष्टियां अपठनीय बताई गई हैं, जबकि कई नक्शों में स्याही फैल जाने से स्पष्टता समाप्त हो गई है।
प्रभावितों का कहना है कि इन त्रुटियों के कारण भूमि स्वामित्व की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इससे भविष्य में कानूनी विवाद उत्पन्न होने की आशंका है। सीताराम, जगत राम, प्यारे लाल, रामपाल, मदन लाल, हरमेश, सरवण कुमार सहित अन्य प्रभावितों ने कहा कि लंबे समय से बंदोबस्त न होने के कारण रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर आ गया है, जिसका सीधा असर वर्तमान अधिग्रहण प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
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प्रभावितों ने मांग की है कि जब तक सभी रिकॉर्ड का विधिवत सत्यापन और संशोधन नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य सहित सभी संबंधित प्रशासनिक और राजस्व प्रक्रियाओं को स्थगित रखा जाए। साथ ही उपायुक्त से स्वयं हस्तक्षेप कर पूरे मामले की निगरानी करने और त्रुटियों के निवारण के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया गया है।
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