विश्व रोगी सुरक्षा दिवस विशेष
754 बिस्तरों की पूरी क्षमता से संचालित, रोज 1,500 से 2,000 मरीजों की ओपीडी
-क्षेत्रीय अस्पताल में 320 बिस्तरों के मुकाबले सिर्फ 15 सुरक्षा गार्ड, प्रबंधन ने माना पर्याप्त नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में संचालित अस्पतालों में मरीज की सुरक्षा केवल इलाज तक सीमित नहीं है। अस्पताल परिसर में सुरक्षित माहौल, निगरानी, पर्याप्त सुरक्षा कर्मी, दवाइयों की उपलब्धता और तीमारदारों के लिए सुविधाएं भी रोगी सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं। जिले के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो एम्स बिलासपुर में एक हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों और 350 से ज्यादा सुरक्षा गार्ड के जरिये मरीजों और पूरे संस्थान की निगरानी की जा रही है। वहीं, क्षेत्रीय अस्पताल में 320 बिस्तरों की आईपीडी क्षमता के मुकाबले सुरक्षा के लिए केवल 15 गार्ड उपलब्ध हैं।
प्रबंधन के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए नियमित निगरानी की जाती है। इमरजेंसी में भी विशेष निगरानी व्यवस्था है। यहां कार्यकारी निदेशक हर दिन सुबह करीब 9:00 से 11:00 बजे तक इमरजेंसी का राउंड कर सुनिश्चित करते हैं कि मरीजों को किसी तरह की कोई समस्या तो नहीं है। वहीं, हर दिन राउंड के दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों को उपयुक्त दिशा निर्देश भी जारी करते हैं। इमरजेंसी में कोई भी मरीज भर्ती होने के डेढ़ घंटे के अंदर आईपीडी में शिफ्ट होने के निर्देश जारी किए गए हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित डॉक्टर की जवाबदेही भी तय की गई है। आपातकाल में एक समय में करीब 15 से 20 चिकित्सक सेवाएं देते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। बताते चलें कि एम्स में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां रोजाना करीब 1,500 से 2,000 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। अस्पताल में 754 बिस्तरों की क्षमता है और प्रबंधन के अनुसार सभी बिस्तर भरे हुए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही के बीच सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक आईपीडी वार्ड के साथ तीमारदारों के ठहरने के लिए रेस्ट रूम की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे वार्डों में अनावश्यक भीड़ कम करने और मरीजों के उपचार के माहौल को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। अस्पताल में आवश्यक दवाइयों का स्टॉक भी उपलब्ध होने की जानकारी प्रबंधन ने दी है। एम्स में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी नेटवर्क के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
वहीं, दूसरी ओर क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में आईपीडी की क्षमता 320 बिस्तरों की हैं। इसके मुकाबले अस्पताल में फिलहाल 15 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। अस्पताल प्रबंधन ने माना कि मरीजों और अस्पताल की जरूरत के हिसाब से यह संख्या पर्याप्त नहीं है। फिलहाल उपलब्ध मैनपावर के आधार पर ही सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है। प्रबंधन के अनुसार मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) के लिए अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड की मांग भेजी गई है। करीब पांच से छह अतिरिक्त गार्ड की मांग की गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। जिला अस्पताल के एमएस डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में सुरक्षा के लिए 34 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल के विभिन्न हिस्सों को निगरानी के दायरे में रखने का प्रयास किया गया है। हालांकि कैमरों के साथ मौके पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की जरूरत भी महसूस की जा रही है। मरीजों की सुविधा से जुड़ी ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था अभी क्षेत्रीय अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई है। फिलहाल पर्चियां ऑफलाइन बनाई जा रही हैं और मरीजों से पर्ची का शुल्क नहीं लिया जा रहा। ऑनलाइन व्यवस्था के लिए बैंक और एनएचएम स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सुविधा शुरू हो सकेगी। दोनों अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयों का स्टॉक है। वहीं सभी मरीज सुरक्षित माहौल में हैं।