विभाग में सिर्फ एक विशेषज्ञ होने से मरीज परेशान
पांगी से पंजाब तक एम्स में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीज
मेडिकल कॉलेजों से भी बढ़ी है एम्स के लिए रेफरल मरीजों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है। खासकर इकोकार्डियोग्राफी (इको) जांच को लेकर मरीजों का इंतजार बढ़ने लगा है। कार्डियोलॉजी विभाग सप्ताह में केवल तीन दिन ही इको जांच कर रहा है, जबकि चार दिन यह जिम्मेदारी मेडिसिन विभाग संभाल रहा है। ऑपरेशन से पहले होने वाले सभी इको मेडिसिन विभाग करता है, क्योंकि यह रूटीन प्रक्रिया है। यदि मरीज सीधे कार्डियोलॉजी विभाग से जांच करवाना चाहे तो उन्हें कम से कम डेढ़ सप्ताह का इंतजार करना पड़ रहा है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि विभाग में फिलहाल केवल एक ही विशेषज्ञ तैनात है, जो पूरे प्रदेश से आने वाले मरीजों के दबाव को अकेले संभाल रहे हैं। एम्स बिलासपुर में हर हफ्ते करीब 70 इको जांच हो रही है। इनमें लगभग 36 मेडिसिन विभाग और बाकी कार्डियोलॉजी विभाग करता है। मरीजों की संख्या इतनी बढ़ रही है कि कार्डियोलॉजी में वेटिंग में मरीज चल रहे हैं। हालांकि यह वेटिंग ज्यादा लंबी नहीं है, लेकिन जिस तरह से एम्स में मरीजों का दबाव बढ़ रहा है, उसके चलते आने वाले समय में कार्डियोलॉजी के मरीजों का इंतजार और भी बढ़ सकता है।
एम्स बिलासपुर में पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्रों से भी मरीज यहां पहुंच रहे हैं। यही नहीं पंजाब के कई हिस्सों से भी मरीज इलाज के लिए यहां आ रहे हैं। कई मामलों में मेडिकल कॉलेज भी मरीजों को रेफर कर रहे हैं। जिले में सरकारी स्तर पर इको की सुविधा कहीं और उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में यदि मरीज निजी क्लीनिकों का रुख करते हैं तो उन्हें 2600 से 2800 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। यह राशि गरीब और मध्यवर्गीय मरीजों के लिए भारी बोझ है। कार्डियोलॉजी विभाग में केवल एक ही फैकल्टी पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सुविधाओं में विस्तार आवश्यक है।
एम्स प्रबंधन के अनुसार कार्डियोलॉजी में सप्ताह में 30 से ज्यादा और मेिउसिन में भी 36 से ज्यादा इको किए जा रहे हैं। आपात स्थिति उसी समय इको किया जाता है। इसके अलावा कार्डियोलॉजी में सिंगल फैकेल्टी है जिसके चलते सामान्य मरीज को एक से डेढ़ सप्ताह का इंतजार करना पड़ रहा है।