निचली अदालत का दोष सिद्धि व सजा का आदेश किया रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 12 वर्ष पुराने चेक बाउंस मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एसीजेएम घुमारवीं द्वारा सुनाई गई दोष सिद्धि और सजा को कानून के अनुरूप न मानते हुए अपील स्वीकार कर ली।
मामला एक स्कॉर्पियो वाहन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा था। शिकायत के अनुसार वाहन की बिक्री के बाद शेष एक लाख रुपये के भुगतान के लिए चेक जारी किया गया था, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह पेमेंट स्टॉप्ड बाय द ड्रॉअर टिप्पणी के साथ अनादृत हो गया। कानूनी नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 1.50 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को अपील में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान अपीलीय अदालत ने पाया कि संबंधित वाहन शिकायतकर्ता के नाम पर पंजीकृत नहीं था। रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण और बिक्री से जुड़े दस्तावेज पंजीकृत मालिक और आरोपी के बीच निष्पादित हुए थे। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि उसे वाहन बेचने या बिक्री राशि प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त था।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार होने से एनआई एक्ट के तहत कानूनी अनुमान अवश्य बनता है, लेकिन आरोपी ने शिकायतकर्ता की जिरह और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संभावित बचाव स्थापित कर दिया। ऐसे में शिकायतकर्ता कानूनी रूप से देय राशि साबित करने में असफल रहा। इन परिस्थितियों में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत द्वारा पारित दोष सिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त करते हुए अपील स्वीकार कर आरोपी को बरी कर दिया। साथ ही निर्देश दिए कि यदि आरोपी ने कोई राशि जमा कराई है तो अपील की अवधि समाप्त होने के बाद उसे नियमानुसार वापस की जाए।