दो दिवसीय मेले में उत्तर भारत से पहुंचे श्रद्धालु
महिलाओं की रही विशेष भागीदारी, व्यवस्था की कमी से श्रद्धालु परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। बरसंड में 13 और 14 अप्रैल को दो दिवसीय माता रानी रुक्मिणी मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने मेले में भाग लिया। खासकर महिलाओं की उपस्थिति अधिक देखने को मिली, जिन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता के दरबार में हाजिरी भरी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन विवाहित महिलाओं की संतान नहीं होती, वे रुक्मिणी माता के दरबार में संतान प्राप्ति की कामना लेकर आती हैं। मान्यता है कि माता रानी उनकी मनोकामना पूरी करती हैं और इसके बाद महिलाएं दोबारा मंदिर पहुंचकर श्रद्धा अनुसार भेंट अर्पित करती हैं। मेले के दौरान महिलाओं की ओर से रुक्मणी कुंड में स्नान करने की परंपरा भी निभाई गई। यह परंपरा वर्षों पुरानी है और श्रद्धालु इसे आस्था के साथ निभाते हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी स्वर्गीय वैद्य शमशेर सिंह चंदेल रुक्मिणी कुंड समिति द्वारा बिलासपुरी धाम का आयोजन किया गया। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया और समिति के प्रयासों की सराहना की। मेले के दौरान व्यवस्थाओं की कमी भी उजागर हुई। विशेष रूप से महिलाओं के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था न होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रमुख धार्मिक स्थल पर बुनियादी सुविधाएं जल्द सुनिश्चित की जाएं।
समिति के प्रधान दिव्यांश चंदेल, वरिष्ठ प्रधान प्रभात चंदेल, प्रधान विनोद चंदेल, महासचिव प्रकाश चंद, सह सचिव राजेंद्र चंदेल, कोषाध्यक्ष विपिन चंदेल, मीडिया प्रभारी रतन देव, प्रभु राम शर्मा, मुख्य सलाहकार राजेंद्र प्रसाद, पवन चंदेल, रूप लाल चंदेल, राकेश चंदेल, मानसिंह चंदेल, नरेंद्र शर्मा, प्रोफेसर बालवीर चंदेल, यशवंत चंदेल, नंदलाल शर्मा, राजेंद्र शर्मा, प्रकाश दीवान और मनोहर लाल शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने मेले के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।