एम्स में मरीजों, तीमारदारों को बताए नली और मूत्र थैली की साफ-सफाई के तरीके
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अस्पताल में मरीज के इलाज के दौरान लगाया गया मूत्र कैथेटर जितना जरूरी है, उतनी ही सावधानी उसकी देखभाल में बरतना भी जरूरी है। कैथेटर की नली में मोड़ आ जाना, मूत्र की थैली को गलत स्तर पर रखना या बार-बार नली को खोलना संक्रमण का कारण बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स बिलासपुर के सामान्य शल्य चिकित्सा वार्ड में मरीजों और तीमारदारों को कैथेटर की देखभाल के तरीके बताए गए।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग के बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य शिक्षा सत्र के दौरान मरीजों और उनके साथ मौजूद तीमारदारों को बताया कि कैथेटर को छूने से पहले और बाद में हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। कैथेटर के आसपास की सफाई नियमित रूप से करने के साथ यह भी जरूरी है कि मूत्र की निकासी वाली पूरी व्यवस्था बंद रहे। बिना जरूरत कैथेटर की नली को अलग करने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। सत्र में खास तौर पर समझाया गया कि मूत्र की थैली को हमेशा मूत्राशय के स्तर से नीचे रखा जाए। इससे मूत्र के वापस ऊपर जाने की आशंका कम होती है। कैथेटर की नली में किसी तरह का मोड़ या दबाव नहीं होना चाहिए और उसे खींचने से भी बचाना चाहिए। मूत्र की थैली को समय-समय पर खाली करना भी जरूरी बताया गया। मरीजों और तीमारदारों को मूत्र मार्ग संक्रमण के शुरुआती संकेतों के प्रति भी जागरूक किया गया। विद्यार्थियों ने केवल मौखिक जानकारी देने के बजाय प्रदर्शन और चित्रों के माध्यम से कैथेटर की देखभाल का तरीका समझाया। इससे तीमारदारों को यह समझने में मदद मिली कि अस्पताल में मरीज की देखभाल के दौरान किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सत्र में प्रतिभागियों ने सवाल पूछकर अपनी शंकाएं भी दूर कीं। एम्स के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ऐसी गतिविधियों में विद्यार्थियों को मरीजों से सीधे संवाद करने और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझाने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।