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बिना सरकारी अनुमति बाहरी व्यक्ति ने तीन जगह की है जमीन की खरीद
शिकायतकर्ता ने ली न्यायालय की शरण, लंबे अरसे से दबा था मामला
व्यक्ति ने खुद को लढ़याणी का निवासी दिखाकर कराई थी जमीन की रजिस्ट्री
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी थाना क्षेत्र में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 का उल्लंघन करते हुए जमीन खरीदने का मामला सामने आया है। पुलिस ने न्यायालय के आदेशों के बाद घुमारवीं थाना में इस संदर्भ में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।
मामला कई दशकों पुराना बताया जा रहा है, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से लगातार प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जाती रही, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। शिकायतकर्ता संजय कुमार निवासी बाड़ा दा घाट ने बताया कि उन्होंने 8 जुलाई को भराड़ी थाना में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 18 अगस्त को उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक के समक्ष मामला उठाया, जहां से जांच के निर्देश दिए गए, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर शिकायतकर्ता ने 5 सितंबर को न्यायालय में याचिका दायर की। न्यायालय ने सभी तथ्यों की समीक्षा करने के बाद पुलिस को 8 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए, जिसके बाद घुमारवीं थाना में मामला दर्ज कर लिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, भराड़ी में रहने वाला एक व्यक्ति, जो मूल रूप से हिमाचल प्रदेश का निवासी नहीं है, ने साल 1985 में लढ़याणी गांव में तीन विस्वा जमीन खरीदी। आरोप है कि उस समय इस व्यक्ति ने खुद को लढ़याणी का निवासी दिखाकर रजिस्ट्री करवाई और सरकार से धारा 118 के तहत कोई अनुमति नहीं ली। इसी व्यक्ति ने साल 2000 में राजस्व विभाग से इस भूमि का कृषि प्रमाणपत्र बनवाया, जिसके आधार पर सुमाड़ी गांव में एक बीघा अतिरिक्त जमीन खरीदी गई। इसके बाद, उसकी पत्नी के नाम बाडा दा घाट कस्बे में एक बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री और करवाई गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब यह व्यक्ति हिमाचल का मूल निवासी नहीं है और सरकारी अनुमति भी नहीं ली गई, तो यह रजिस्ट्री किस तरह हो गई यह जांच का विषय है। डीएसपी घुमारवीं विशाल वर्मा ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच कर रही है।
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शिकायतकर्ता बोले, राजस्व अभिलेखों में मिलीभगत से हुआ खेल
संजय कुमार का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से भूमि क्रय प्रक्रिया पूरी की गई। उनका आरोप है कि स्थानीय राजस्व कर्मचारियों और दस्तावेज तैयार करने वालों ने बिना सत्यापन के गलत जानकारी दर्ज की। बाहरी व्यक्ति द्वारा राज्य की भूमि खरीदना, वो भी बिना सरकारी अनुमति के, स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है। यह केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रशासनिक चूक का मामला भी है।
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पुलिस जांच में जुटी, दस्तावेजों की पड़ताल शुरू
न्यायालय के आदेशों के बाद दर्ज की गई एफआईआर में धारा 118 के उल्लंघन से संबंधित धाराओं को शामिल किया गया है। फिलहाल पुलिस ने राजस्व रिकॉर्ड, कृषि प्रमाणपत्र और संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेज तलब किए हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ कागज संदिग्ध पाए गए हैं। पुलिस टीम राजस्व विभाग और तहसील कार्यालय से भूमि अभिलेखों की सत्यता की जांच कर रही है।
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क्या कहती है धारा 118
हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के तहत कोई भी गैर-कृषक व्यक्ति अर्थात जो खेती नहीं करता या जो राज्य का स्थायी निवासी नहीं है, राज्य सरकार की अनुमति लिए बिना हिमाचल प्रदेश में कृषि भूमि नहीं खरीद सकता। इस कानून का उद्देश्य बाहरी लोगों द्वारा हिमाचल की भूमि पर अंधाधुंध कब्जा रोकना और स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा करना है।