बिलासपुर। कोरोना के तीसरे वैरिएंट ओमिक्रॉन से बचाव को लेकर जिला प्रशासन समेत स्वास्थ्य महकमे की तैयारी पूरी नहीं हो पाई है। दूसरी लहर ने भी जिला बिलासपुर में काफी तबाही मचाई थी, लेकिन उसके बाद भी जिला में स्वास्थ्य व्यवस्था के हालात सुधर नहीं पाए हैं।
जिला बिलासपुर की 5 लाख आबादी सिर्फ 19 एंबुलेंस के भरोसे है। वहीं, जिला अस्पताल बिलासपुर में 60 बैड कोविड सेंटर बनाया गया है, लेकिन एमडी की सुविधा अभी भी नहीं है।
बता दें कि लोगों को आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस व्यवस्था का अच्छा होना काफी आवश्यक है। वहीं, अगर एंबुलेंस की व्यवस्था ही ठीक नहीं होगी तो लोगों को न तो समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल पाएगी। न ही सही समय पर उपचार मिल पाएगा।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण अब स्थिति ऐसी हो गई है कि जिले की पांच लाख की आबादी के लिए सिर्फ 19 एंबुलेंस ही मौजूद हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भी स्वास्थ्य विभाग को 8 टैक्सी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा था, लेकिन मौजूदा एंबुलेंस की स्थिति को बेहतर करना भी स्वास्थ्य विभाग के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है। वहीं, जिला अस्पताल में कोविड सेंटर तो बना दिया है, लेकिन पिछले कई माह से जिला अस्पताल में एमडी ही नहीं है। वहीं सीएचसी स्वारघाट में अभी तक ऑक्सीजन प्लांट शुरू नहीं हो पाया है। इसकी प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह कब तक तैयार होगा इसकी कोई जानकारी नहीं है। इस कारण नयना देवी क्षेत्र के लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल पहुंचने के लिए लगभग 120 किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा।
जिला अस्पताल में चार एंबुलेंस पर एक चालक
एक एंबुलेंस के लिए तीन सिफ्टों में 3 ड्राइवर की आवश्यकता होती है, लेकिन जिला अस्पताल में 4 एंबुलेंस मौजूद हैं। इनके लिए वर्तमान में सिर्फ एक ही ड्राइवर है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को आपातकाल स्थिति में एंबुलेंस के लिए दो-दो घंटे इंतजार करना पड़ता था। इस कारण लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता था। यह हाल सिर्फ जिला अस्पताल का ही नहीं है, बल्कि फील्ड में मौजूद अन्य एंबुलेंस पर भी ड्राइवरों के कई पद खाली है। अब अगर ओमिक्रॉन लहर फिर से दस्तक देती है, तो स्वास्थ्य विभाग के तैयारियों को लेकर दावे हवा हो जाएंगे।
सीएचसी स्वारघाट में पांच हजार की आबादी के एक चिकित्सक
सीएचसी स्वारघाट पर क्षेत्र की करीब 5 हजार की आबादी निर्भर है। वहीं, पूरे सीएससी स्वारघाट में सिर्फ एक ही चिकित्सक सेवाएं दे रहा है, लेकिन ये सेवाएं भी लोगों को सिर्फ 4 बजे तक ही मिल पाती हैं। स्वारघाट क्षेत्र में ज्यादातर हादसे होते रहते हैं, जिनको प्राथमिक उपचार के लिए सीएचसी स्वारघाट लाया जाता है। वहीं, कोरोना की तीसरी लहर में किस तरह से स्थिति को संभाला जाएगा। यह एक बड़ा सवाल है।
-जिला स्वास्थ्य विभाग ओमिक्रॉन को लेकर पूरी तरह से तैयार है। लोगों को समय-समय पर इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। वैक्सीनेशन अभियान जारी है। वहीं, फील्ड में प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा सैंपलिंग की जा रही है। बाहरी देशों से आने वाले लोगों को कोरोना टेस्ट के बाद आइसोलेट किया जा रहा है। वहीं, दो बार उनकी टेस्टिंग की जा रही है। अगर ओमिक्रोन की लहर आती है, तो लोगों को सुविधाएं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त साधन हैं। -सीएमओ, प्रवीण चौधरी