अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
सुबह दस बजते ही झंडूता के छम्वाण स्कूल में शिक्षा उपनिदेशक अचानक आ धमके। बच्चे कक्षाओं में बैठे थे। उनको पढ़ाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। कक्षाएं बिना अध्यापक के चल रही थीं। निरीक्षण किया तो पाया जेबीटी अध्यापिका दूसरी जगह नाश्ता करने में व्यस्त थीं।
शिक्षा उपनिदेशक को देख वे भौचक्की रह गईं। जब शिक्षा उपनिदेशक ने कक्षा में न बैठने की वजह पूछी तो वो संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। इस पर शिक्षा उपनिदेशक ने चेतावनी दी कि अगर दोबारा ऐसा किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
असल में शिक्षा उपनिदेशक वीरवार को औचक निरीक्षण पर थे। उन्होंने झंडूता उपमंडल के कई स्कूलों का दौरा किया। इससे स्कूल स्टाफ में हड़कंप मच गया। कुछ स्कूलों में सुबह दस बजे शिक्षक नहीं थे। हालांकि शिक्षा विभाग ने अभी इस संबंध में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। शिक्षकों को महज चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। उन्हें चेताया कि भविष्य में अगर इस प्रकार की कोताही बरती तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि उप-निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर ने 30 नवंबर को प्रारंभिक शिक्षा खंड झंडूता के अंतर्गत 6 पाठशालाओं राप्रापा ढाहड, छबाण, समोह, बैहरन, रामापा छम्वाण और बैहरन का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान राप्रापा छम्वाण में जेबीटी अध्यापिका सुबह 10 बजे नाश्ता करते हुए पाई गईं। कक्षाएं बिना अध्यापक चल रही थी। राप्रापा ढाहड में एमडीएम किचन में सफाई व्यवस्था असंतोषजनक पाई गई।
इसके बाद उप-निदेशक ने सात दिसंबर को प्रारंभिक शिक्षा खंड सदर के अंतर्गत छह पाठशालाओं रानी कोटला, करोट, ब्रहमपुखर, कोठी मझेड़, लुहारड़ा और राउपा लुहारड़ा स्कूलों का भी औचक निरीक्षण किया। रानी कोटला में अध्यापक कक्षा में नहीं पाया गया। इसको लेकर उप-निदेशक ने कड़ा संज्ञान लिया और अध्यापकों को चेताया कि भविष्य इस तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा समोह, बैहरन, करोट, ब्रहम्पुखर, कोठी-मझेड़ और लुहारड़ा पाठशालों में शिक्षा गुणवत्ता, अनुशासन और सफाई व्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर पाया गया।