शहीदों के सम्मान में ईंट और सीमेंट का दें दान
एक ईंट शहीद के नाम महाअभियान अब बिलासपुर से होगा शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एक ईंट शहीद के नाम महाअभियान अब बिलासपुर जिले में शुरू हो रहा है। इसके तहत शहीदों को सही मायनों में सम्मान दिया जाएगा।
उपायुक्त बिलासपुर विवेक भाटिया ने बताया कि इस प्रयास से शहीदों व उनके परिवारों के लिए कुछ करने का मौका मिलेगा। यह सौभाग्य की बात है कि यह शहीदों को लौटाने का एक छोटा सा प्रयास है। उन्होंने बताया कि एक ईंट शहीद के नाम अभियान में सबसे खास बात यह है कि राष्ट्रभक्ति के इस महायज्ञ में आप भी अपनी आहुति डाल सकते हैं। अनूठी बात यह है कि इसमें कोई भी व्यक्ति सिर्फ ईंट व सीमेंट जैसी चीजों से अपना सहयोग दे सकता है।
किसी से भी नकद राशि नहीं ली जाएगी। ईंट के साथ श्रमदान भी किया जा सकता है । उन्होंने बताया कि शहीदों के नाम पर लोगों के काम आ सकने वाली चीजें निर्मित की जाएंगी। इससे न केवल युवाओं को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि वे भी उनके नक्शे कदम पर चलकर देशसेवा और राष्ट्रहित का काम कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि शहीदों की इसी शहादत का कर्ज चुकाने के लिए प्रणय मीडिया हरियाणा के बाद अब हिमाचल प्रदेश में इस अनूठी पहल को आगे बढ़ाएगा। उपायुक्त विवेक भाटिया ने बताया कि जिला बिलासपुर वीरभूमि के नाम से भी प्रसिद्ध है। बिलासपुर की इस धरती पर विक्टोरिया क्रॉस कै. वीर भंडारी राम और हवलदार संजय कुमार जैसे वीर योद्धा हुए। हवलदार संजय कुमार ने ऑपरेेशन विजय के दौरान दुश्मनों को लोहे के चने चबाए तथा उन्हें भारतीय सेना के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से अलंकृत हुए। बिलासपुर जिला के ही शहीद नायक किरपाराम को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बहादुरी के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा दूसरा सबसे बड़ा बहादुरी पुरस्कार जॉर्ज क्रॉस प्राप्त हुआ।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला से लगभग 3560 अधिकारी व सैनिक जल, थल और वायु सेना में सेवारत हैं। जिला में पूर्व सैनिकों की संख्या 10322 है। थल सेना से 7751, वायुसेना से 100 और एयरफोर्स से 92 सैनिक सेवानिवृृत्त हुए हैं। जिला के 123 जवानों ने अपनी शहादत दी है। उन्होंने बताया कि जिला में 62 वीरता पुरस्कार विजेता जिसमें परमवीर चक्र विजेता 1, कीर्ति चक्र विजेता 1, वीरचक्र 3, शौर्य चक्र 5, सेना मेडल विजेता 35, सेना मेडल 1, विशिष्ट सेवा मेडल 8, मेशन इन डिस्पैच 4 शामिल हैं।
शहीदों के नाम बन चुका है दंगल का अखाड़ा
अभियान के संयोजक संजीव राणा ने बताया कि अभियान की शुरुआत हरियाणा के करनाल व कुरुक्षेत्र जिले से हुई थी। अच्छी बात यह है कि लोगों के अथाह सहयोग से करनाल में शहीद राम मेहर के नाम पर अखाड़ा बनाया जा चुका है। युवा इस अखाड़े में रोजाना जोर आजमाइश कर रहे हैं। राम मेहर छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए थे। कुरुक्षेत्र में पेहवा के शहीद के नाम पर खूबसूरत पार्क बनाया गया है।
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उपायुक्त विवेक भाटिया ने बताया कि इस अभियान के तहत किसी भी व्यक्ति से नकदी के रूप में कुछ नहीं लिया जाएगा। शहीद स्मारक में लाइट एंड साउंड सिस्टम लगाया जाएगा। इससे शहीदों की गाथा सुनाई जाएगी। इसके अलावा सौंदर्यीकरण के लिए काम किया जाएगा। लोग ईंट, सीमेंट और श्रम दान देकर सहयोग कर सकते हैं।