अदालत ने शिकायतकर्ता, गवाहों के बयानों में नहीं पाई गई एकरूपता
नहीं था कोई स्वतंत्र गवाह, सभी आरोपियों को दिया गया संदेह का लाभ
आरोपियों में अनुसूचित जाति के लोग भी थे शामिल
प्रकाश ठाकुर
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने मारपीट करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, जातिवादी टिप्पणियां करने के एक मामले में सभी 16 आरोपियों को बरी किया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और गवाहों के बयानों में एकरूपता नहीं पाई है और संदेह का लाभ देकर सभी आरोपियों को बरी किया है।
अदालत के फैसले में बताया है कि शिकायतकर्ता और गवाहों ने हाथापाई के बयानों का अलग-अलग वर्णन किया है। अभियोजन पक्ष का पूरा मामला तीन गवाहों की गवाही पर टिका रहा, जिसमें शिकायतकर्ता महिला, उसका बेटा और बहू शामिल हैं। पुलिस की ओर से कोई भी स्वतंत्र गवाह नहीं जोड़ा गया है, जबकि आसपास बहुत से घर थे। दूसरी ओर जिन लोगों को आरोपी बनाया गया, उसमें अनुसूचित जाति के लोग भी शामिल रहे। सभी आरोपी संदेह के लाभ के हकदार हैं, इसलिए बरी किए जाते हैं। शिकायतकर्ता और बरी हुए सभी आरोपी उपमंडल घुमारवीं के मझासू गांव के हैं। मामला जून 2020 का है। घुमारवीं थाना में मझासू गांव की एक महिला की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि सभी आरोपी उसके घर में जबरन घुसे और परिवार के सदस्यों को डंडों से पीटा। उसकी कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से शिकायतकर्ता का अपमान किया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। सभी आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से जातिवादी टिप्पणियां भी कीं। उधर, अभियोजन पक्ष ने अदालत में बताया कि 22 जून की शाम को भी शिकायतकर्ता महिला जब अपने आंगन में नल से पानी भर रही थी तो कुछ महिलाओं ने मिलकर उसे पीटा था। शिकायतकर्ता महिला को उसकी बहू ने बचाया। 24 जून को शिकायतकर्ता महिला पर आरोपियों ने फिर से हमला किया। कमरे में घुसकर उस पर डंडों और लात-घूसों से हमला किया। साथ ही घसीटा भी मामले में शामिल आरोपी पुरुषों ने कमरे में घुस कर महिला के बेटे को भी पीटा। संवाद