अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिले में इस समय डेंगू पूरी तरह से बेकाबू हो चुका है। जिला अस्पताल में अभी तक करीब 1250 से ज्यादा लोगों के डेंगू के टेस्ट हो चुके हैं। इनमें से करीब 600 के आसपास लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन को चाहिए था कि वह अस्पताल में डेंगू की स्थिति को देखते हुए दो और एमडी को तैनात करने की मांग सरकार से करता लेकिन स्वास्थ्य विभाग लोगों की सेहत को लेकर सतर्क नहीं है।
जिला अस्पताल में रोजाना डेंगू के मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। रोजाना 50 से ज्यादा लोगों के डेंगू के टेस्ट किए जा रहे हैं लेकिन जिला अस्पताल में डेंगू का टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पहले डॉक्टर मरीजों को डेंगू का टेस्ट लिख रहा है। इसके बाद सरकारी लैब से मरीज को एक कार्ड दिया जा रहा है जिसे दोबारा से डॉक्टर से भरने को कहा जा रहा है। दिक्कत यह है कि अस्पताल में दो एमडी ही होने के चलते मरीज को डेंगू का टेस्ट करवाने के लिए भी घंटों लाइनों मेें खड़े होना पड़ रहा है। जबकि जो मरीज डेंगू के बुखार से ग्रस्त है उसे भी लाइनों में ही खड़े होकर डॉक्टर का इंतजार करना पड़ रहा है।
डेंगू के बुखार से मंडी जिला का डैहर निवासी मौत का ग्रास बन चुका है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सरकार से भी यहां पर अतिरिक्त एमडी की मांग नहीं की जा रही है ताकि एक एमडी डेंगू के मरीजों को देख सके। वहीं डेंगू के टेस्ट की रिपोर्ट भी एक दिन बाद लोगों को मिल रही है, जबकि निजी लैब में दो घंटे बाद डेंगू के टेस्ट की रिपोर्ट लोगों को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग क्यों अतिरिक्त एमडी की मांग सरकार से नहीं कर रहा है। जबकि डेंगू से ग्रस्त लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
इस बारे में एसएमओ डॉ. सतीश शर्मा का कहना है कि जिला में इस समय दो एमडी तैनात हैं जो मरीजों को देख रहे हैं। लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से डेंगू पर नजर रखे हुए है।