-पहले दिन सिल्वर का 3.71 लाख और कतला का 87,291 बीज डाला
-मत्स्य अधिकारी और सहकारी सभाओं के पदाधिकारी रहे मौजूद
-गोबिंद सागर में 30 लाख और कोल डैम में डाला जाएगा 2.45 लाख बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में मछली बीज डालने का कार्य शुरू हो गया। पहली बार गोबिंद सागर झील में 100 एमएम मछली का बीज डाला जा रहा है। मंगलवार को झील में सिल्वर प्रजाति का 3,71,330 और कतला प्रजाति का 87,291 बीज डाला गया। इस दौरान मत्स्य अधिकारी और मत्स्य सहकारी सभाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।
गोबिंद सागर झील में एक दशक से साल दर साल मछली उत्पादन में कमी आ रही थी। इसके चलते झील में 100 एमएम का बीज डालने निर्णय लिया गया है। इस बार गोबिंद सागर झील में 30 लाख और कोल डैम में 2.45 लाख हजार मछली बीज डाला जाएगा। इसमें सिल्वर, कतला, मृगल और ग्रास प्रजाति का बीज डाला जाएगा। बीज कोलकाता से ठेकेदार के माध्यम से आ रहा है। पहले दिन बीज डालने के दौरान मत्स्य अधिकारी और सहकारी सभाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे, ताकि बीज डालने का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक सोमनाथ ने इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को सही तरीके से बीज डालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीज अच्छी तरह से डाला जाए और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए तो उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी।
बता दें कि गोबिंद सागर झील में लगातार मछली उत्पादन में गिरावट हो रही थी। इसके लिए दो साल पहले सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिफरी) बैरकपुर कोलकाता की टीम ने गोबिंद सागर झील का दौरा किया और हर एक पहलू पर अध्ययन किया। उनका सुझाव था कि झील में 100 एमएम का बीज डाला जाए। इसके बाद प्रदेश सरकार और विभाग ने 100 एमएम का बीज डालने का निर्णय लिया था। बीज डालने की प्रक्रिया चलती रहेगी। अधिकारियों और मत्स्य सहकारी सभाओं की निगरानी में ही यह बीज डाला जाएगा।