संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कोठीपुरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों को मेडिसिन विशेषज्ञ के पास जांच करवाने के लिए 20 से 22 दिन पहले पंजीकरण करवाना पड़ रहा है। न्यूरोलॉजी ओपीडी में 10 दिन और एंडोक्रोनालॉजी ओपीडी के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ रहा है।
वहीं बिलासपुर जिला अस्पताल में अधिकतर विभागों में विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं।
सर्जरी और मेडिसिन विशेषज्ञ न होने से लोग एम्स में जा रहे हैं। लेकिन वहां पर भी लोगों को दो से ढाई हफ्ते तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह है कि आपात स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है।
एम्स में तीन मेडिसिन विशेषज्ञ तैनात हैं। इनमें से एक स्टाफ के लिए और दो आम लोगों की जांच के लिए नियुक्त है। दो विशेषज्ञ एक दिन में मेडिसिन के 60 से 70 मरीजों की जांच कर रहे हैं। इसके बावजूद हालात यह है कि लोगों को जांच के लिए 22 दिन पहले पंजीकरण करवाना पड़ रहा है। एम्स में जांच के लिए हमीरपुर, मंडी, कुल्लू, ऊना तक के मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में एमडी नहीं होने से एम्स के चिकित्सकों कार्य और बढ़ गया है। एम्स में न्यूरोलॉजी ओपीडी में 10 दिन और एंडोक्रोनालॉजी ओपीडी के लिए एक सप्ताह पहले पंजीकरण करवाना पड़ रहा है। मेडिसिन के अलावा अन्य सभी ओपीडी में एक दिन में 25-30 मरीजों की जांच की जाती है। इसके बाद मरीजों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है।