पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई उन्नत फसल किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन किस्मों की विशेषता अधिक उत्पादन, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुकूलता रही। इन किस्मों को अपनाने से किसानों की उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि हुई। प्रो. गौतम ने कृषि विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखते हुए आधुनिक तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने का कार्य किया। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड डेमो और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के निदेशक के रूप में उन्होंने दुर्लभ और विलुप्तप्राय फसल प्रजातियों के संरक्षण का नेतृत्व किया।
उनके प्रयासों से देश की जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिली। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय सोलन में डीन, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर और आईसीएआर में विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को नई दिशा दी। अपने अकादमिक जीवन में उन्होंने सैकड़ों कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी किया। प्रो. प्रेमलाल गौतम का जीवन कृषि और किसानों के उत्थान को समर्पित रहा है। पद्मश्री सम्मान मिलने पर उनके पैतृक गांव कंडयाना सहित पूरे बिलासपुर और हिमाचल प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे समर्पण, शोध और उपलब्धियों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।