फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुपोषण से जंग: गर्भधारण से पहले महिलाओं की होगी पोषण जांच, ऊना में चलेगा पायलट प्रोजेक्ट

Sat, 13 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh धर्मेंद्र पंडित, शिमला।

सार

प्रदेश में मातृ एवं शिशु कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए अब गर्भधारण से पहले ही महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान दिया जाएगा।
विज्ञापन
गर्भधारण से पहले होगी पोषण जांच। - फोटो : FreePik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश में मातृ एवं शिशु कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए अब गर्भधारण से पहले ही महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग से ऊना जिले में वुमन एंड इन्फैंट्स इंटीग्रेटेड ग्रोथ स्टडी (विंग्स) मॉडल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इसके तहत महिलाओं को गर्भधारण से पहले पोषण, एनीमिया, मानसिक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सेवाओं से जोड़ा जाएगा। ऊना में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे पूरे राज्य समेत देशभर में लागू किया जाएगा।

विज्ञापन
Trending Videos

विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में बच्चों में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में पांच वर्ष से कम आयु के करीब 31 प्रतिशत बच्चे ठिगनापन (स्टंटिंग) से प्रभावित हैं। लगभग 26 प्रतिशत बच्चे कम वजन (अंडरवेट) और 17 प्रतिशत बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों में कुपोषण के ये स्तर अब भी प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती बने हैं। छह से 59 माह तक के 55 प्रतिशत से अधिक बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। महिलाओं में भी एनीमिया की दर 53 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, एनीमिया और वजन की स्थिति में सुधार गर्भधारण से पहले किया जाए तो कम वजन वाले बच्चों के जन्म, शिशु मृत्यु और बच्चों में कुपोषण को काफी हद तक रोका जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस प्रोजेक्ट के लिए हिमाचल को चुना गया है। यह प्रोजेक्ट ऊना जिले के पांच विकास खंडों में 36 माह तक चलेगा। इसमें आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मिलकर महिलाओं और बच्चों की नियमित निगरानी करेंगे।
विज्ञापन

हिमाचल प्रदेश में मातृ एवं शिशु कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए अब गर्भधारण से पहले की अवस्था पर फोकस किया जाएगा। ऊना जिले में विंग्स मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत महिलाओं को गर्भधारण से पहले ही पोषण, एनीमिया, मानसिक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सेवाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों में जन्म से पहले ही कुपोषण के जोखिम को कम किया जा सके। -प्रदीप कुमार, निदेशक, एनएचएम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें