बैंक लोन घोटाला। (सांकेतिक तस्वीर)।
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38 करोड़ रुपये के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में आरोपी युद्ध चंद बैंस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बैंस की संपत्ति जब्त करने की तैयारी चल रही है। आरोपी की उन संपत्तियों को खंगाला जा रहा है, जिनके एवज में प्रोजेक्ट बनाने के लिए लोन लेने की पेशकश की गई। अब प्रॉपर्टी बेचकर बैंक अपना पैसा रिकवर करेगा। विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी बैंस ने अपने रिश्तेदारों को गारंटर बनाया है। अब आरोपी के रिश्तेदारों से भी विजिलेंस पूछताछ करेगा।
विजिलेंस ब्यूरो ने लोन संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए विभिन्न बैंकों के विशेषज्ञ बुलाए हैं। ये बैंस से जुड़े लोन संबंधित मामलों का पुराना रिकाॅर्ड खंगाल रहे हैं। बैंक अधिकारियों के कहने पर ही विजिलेंस की टीम ने ऊना और धर्मशाला से रिकॉर्ड मंगवाया है। यह भी पता चला है कि आरोपी ने मंडी और मनाली में होटल बनाने के मकसद से लोन लिया था। मंडी में कुछ काम हुआ है, जबकि मनाली में एक ईंट नहीं लगी है। ऐसे में बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कैसे लोन दे दिया गया।
उल्लेखनीय है कि कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड (केसीसीबी) के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर 38 करोड़ रुपये का फर्जी तरीके से लोन लेने और धोखाधड़ी करने के आरोप में विजिलेंस ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की है। मैसर्स हिमालय स्नो विलेज और होटल लेक पैलेस के मालिक युद्ध चंद बैंस पर आरोप है कि उसने बैंक स्टाफ से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से लोन ले लिया। वहीं, बैंक अधिकारियों पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी स्वयं की ऋण नीतियों के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों की भी अवहेलना की।