हिमाचल की अधिकांश जल विद्युत परियोजनाएं बरसाती जल स्रोतों पर निर्भर हैं। मानसून की समाप्ति और नदियों में जलस्तर घटने के कारण टरबाइन फुल क्षमता से नहीं चल पा रही हैं। नतीजतन, प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर असर पड़ा है। तापमान में गिरावट और ठंडक बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की मांग 330 से 340 लाख यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई है। घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा हीटर, गीजर और अन्य उपकरणों के इस्तेमाल बढ़ने से खपत लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में उत्पादन और मांग के बीच करीब 70 से 80 लाख यूनिट प्रतिदिन का अंतर बन गया है। इस कमी को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड ने पंजाब और छत्तीसगढ़ से रोजाना 50 से 60 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की है। गर्मियों में हिमाचल ने इन राज्यों को बैंकिंग व्यवस्था के तहत बिजली दी थी, जिसे अब वापस लिया जा रहा है। गर्मियों में जब जलविद्युत परियोजनाएं पूरी क्षमता पर चल रही थीं, तब हिमाचल ने अतिरिक्त बिजली पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों को बैंकिंग पर दी थी। अब इन राज्यों से वही बिजली वापस ली जा रही है ताकि मौजूदा मांग पूरी की जा सके।