अर्मेनिया-अजरबैजान, रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास के बीच युद्ध में तकनीक खासकर ड्रोन का निर्णायक उपयोग हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर से यह सिद्ध हो गया कि भारतीय सेना भी आधुनिक तकनीक को शीघ्रता से अपना सकती है। आरट्रैक का सेंटर फॉर आर्मी लेसंस लर्न्ड इन अभियानों का अध्ययन कर प्रशिक्षण प्रणाली को लगातार बेहतर कर रहा है। आरट्रैक भारतीय सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
शर्मा ने कहा कि वर्ष 2024–25 को सेना ने आधुनिक तकनीकी समावेश का वर्ष घोषित किया है। ड्रोन युद्ध, साइबर क्षमताएं, बैटलफील्ड एआई और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को रणनीतिक तौर पर प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों में 14 विशेषज्ञता केंद्र स्थापित किए गए हैं। 2030 तक इन सभी तकनीकों को पूरी तरह प्रशिक्षण में शामिल करने का लक्ष्य है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 390 करोड़ रुपये का निवेश होगा।