मौजूदा समय में डिपो संचालक हॉट स्पॉट की मदद से अपने मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर पॉस मशीनें चला रहे हैं। डिपो संचालक संघ यह समस्या कई बार सरकार के समक्ष उठा चुका है। विभाग ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। डिपो संचालक संघ के उपाध्यक्ष हर्ष ओबराय का कहना है कि 2016 में राशन डिपो में पॉस मशीनें लगाई गई थीं, 2018 से ऑनलाइन सिस्टम पूरी तरह लागू कर दिया गया। शुरुआती एक साल में मशीनें लगाने वाली कंपनी ने रिचार्ज का खर्चा उठाया, उसके बाद से डिपो संचालक अपने स्तर पर मशीनें चला रहे हैं। जबकि कंपनी सरकार से सेवा के एवज में पैसा ले रही है। मशीनों में तकनीकी खराबी आने पर भी कंपनी डिपो संचालकों से मनमानी वूसली कर रही है।
राशन डिपो को एक माह के भीतर स्थायी इंटरनेट कनेक्टिविटी देने के प्रयास किए जा रहे हैं। कंपनियों से बातचीत की जा रही है। स्थायी इंटरनेट कनेक्टिविटी से सिग्लन की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। राशन के लिए उपभोक्ताओं को समस्या पेश नहीं आने दी जाएगी- राम कुमार गौतम, निदेशक खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग