एम्स में बोन मैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा विकसित करने की भी तैयारी
इस थेरेपी के साथ एम्स में बोन मैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा विकसित करने की भी तैयारी है। आर्थोपेडिक्स में रोबोट की मदद से सर्जरी की सुविधा एम्स में पहले से शुरू हो चुकी है। अब रोबोटिक सर्जरी को और आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे जटिल ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की क्षमता बढ़ेगी। एम्स बिलासपुर में प्रदेश का सबसे बड़ा अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र विकसित किया जाएगा। केंद्र केवल बिलासपुर के मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हिमाचल के लिए रेफरल, मार्गदर्शन और समन्वय केंद्र के रूप में काम करेगा। इसके साथ उन्नत टेलीकेयर नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा। इससे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में बैठे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय शोध प्रयोगशाला की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा
गंभीर मामलों में स्थानीय अस्पतालों से एम्स तक मरीजों को भेजने और उपचार के संबंध में मार्गदर्शन देने की व्यवस्था मजबूत होगी। एम्स की केंद्रीय शोध प्रयोगशाला की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत बीएसएल-3 स्तर की विशेष प्रयोगशाला विकसित होगी। यह ऐसी सुरक्षित प्रयोगशाला होगी, जहां गंभीर संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु और वायरस पर नियंत्रित तरीके से शोध किया जा सकेगा। इसके साथ एनिमल बीएसएल-3 सुविधा भी विकसित की जाएगी, जहां बीमारियों और उपचार से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन किए जा सकेंगे। संस्थान हिमाचल की स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़े शोध पर विशेष ध्यान देगा। अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञों को साथ लेकर जटिल बीमारियों पर शोध करने के साथ मनुष्य, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ ध्यान में रखकर शोध किया जाएगा। स्वदेशी चिकित्सा तकनीक विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
डॉक्टर इलाज के साथ शोध भी करेंगे
एम्स में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप मजबूत किया जाएगा। पीएचडी कार्यक्रमों के साथ ऐसे डॉक्टर तैयार करने की योजना है, जो मरीजों का इलाज करने के साथ चिकित्सा क्षेत्र में शोध भी करें। नए चिकित्सा विचारों और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए नवाचार, प्रशिक्षण और नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसके लिए आईआईटी मंडी और आईआईएम सिरमौर के साथ भागीदारी की जा रही है।
एम्स बिलासपुर की परिकल्पना राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में की गई है। अगले दो साल में बोन मैरो, लिवर ट्रांसप्लांट, कार-टी थेरेपी, सटीक उपचार की नई पद्धतियां, बीमारी की पहचान के साथ उपचार तय करने वाली आधुनिक चिकित्सा और रोबोटिक सर्जरी जैसी क्षमताएं विकसित करने का लक्ष्य है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए विकसित होने वाला केंद्र पूरे हिमाचल के लिए रेफरल, मार्गदर्शन, समन्वय केंद्र के रूप में काम करेगा।
-डॉ. एनके अरोड़ा, अध्यक्ष एम्स