चीन अधिकृत तिब्बत सीमा से लगते हिमाचल के गांवों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत करने के लिए सरकार ने 70 विकास योजनाओं को प्रारंभिक मंजूरी दी है। इन पर करीब 166 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह योजनाएं किन्नौर और लाहौल-स्पीति के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए हैं। प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के बाद केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और इनके लिए वित्तीय मंजूरी मांगी जाएगी। सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इन योजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आरडी नजीम और जनजातीय विकास विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में योजनाओं की प्राथमिकता, लागत और केंद्र को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर विचार किया गया।
केंद्र सरकार भी हिमाचल से सीमावर्ती क्षेत्रों में अब तक किए गए विकास कार्यों और आगे प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी लगातार मांग रही है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर सीमावर्ती गांवों की जरूरतों के आधार पर नए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। अब इन 70 योजनाओं को अंतिम रूप देकर केंद्र को भेजा जाएगा जिससे इनके लिए करीब 166 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता हासिल की जा सके। इन विकास कार्यों का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, संचार और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर करना है। सरकार का जोर स्थानीय लोगों को गांवों में ही सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका के लिए उन्हें दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन न करना पड़े। सीमावर्ती इलाकों में आबादी का बने रहना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।