फास्ट ट्रैक कोर्ट ने हत्या के आरोप में हरियाणा के जिला झज्जर के गांव छारा निवासी जितेन्द्र उर्फ जीता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन के अनुसार गांव छारा में 14 अक्तूबर 2010 को धन्ना पहलवान के बेटे धर्मेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
आरोप है कि पैसे के लेन-देन में गांव के जितेन्द्र उर्फ जीता ने उसे बुलाया था और गोली मारकर हत्या कर दी।
धर्मेंद्र को गंभीर अवस्था में रोहतक पीजीआई ले जाया गया था, जहां उसकी मौत हो गई थी।
इस मामले में मोनू उर्फ जयमीत पर आरोप था कि उसने जीता को अपनी स्कार्पियो में भगाने में मदद की।
इसके अलावा गुड़गांव के गांव तिरपड़ी निवासी मायाराम और छारा गांव के प्रदीप पर भी आरोपी को पनाह और सहयोग देने का आरोप था।
इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
न्यायाधीश राज गुप्ता ने मायाराम और प्रदीप को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि मुख्य आरोपी जीता को हत्या के मामले में उम्रकैद, दस हजार रुपये जुर्माना और आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जीता को हत्या के मामले में जुर्माना न भरने की सूरत में दो साल की सजा और आर्म्स एक्ट में एक हजार रुपये जुर्माना न भरने की सूरत में 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।