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पीली क्रांति में हरियाणा भारत का सिरमौर

Wed, 15 Jan 2014 10:37 PM IST
अमर उजाला गुड़गांव
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हरियाणा को अभी तक हरित और श्वेत क्रांति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब पीली क्रांति भी इसकी पहचान बन रही है। प्रदेश को पीली क्रांति में सिरमौर बनाने में दक्षिणी क्षेत्र का विशेष योगदान है। सरसों उत्पादन को पीली क्रांति की संज्ञा दी जाती है। प्रदेश में सरसों के कुल उत्पादन का 70 फीसदी गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात, रेवाड़ी, झज्जर और भिवानी जिले से प्राप्त होता है।
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साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन (एसएआई) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति वर्ष करीब 60 लाख टन सरसों का उत्पादन होता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से सरसों की बिजाई में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान आगे हैं, लेकिन उत्पादन में हरियाणा का नाम सबसे ऊपर आता है। यहां 2011-12 के दौरान 511 हजार हेक्टेयर में 847 हजार टन सरसों की पैदावार हुई। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जहां पिछले तीन सालों में सरसों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं हरियाणा में पैदावार लगातार बढ़ी है। सरसों उत्पादन में हरियाणा के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए सरसाें अनुसंधान एवं संवर्धन परिषद् (एमपीआरसी) ने राज्य मेें विशेष केंद्र खोलने की योजना बनाई है। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को सरसाें की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया जाएगा। एमपीआरसी का दावा है कि सरसों की महज 10 फीसदी पैदावार बढ़ाकर विदेशों से आयात तेलों पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा में 40 फीसदी की बचत की जा सकती है। ऐसे में हरियाणा पीली क्रांति को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा सकता है।

आंकड़ों में पीली क्रांति
जिला             कुल रकबा हेक्टेयर        औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर
गुड़गांव                12500                            1842 किलोग्राम
मेवात                  25500                           9043 किलोग्राम
महेंद्रगढ़              98300                            4137 किलोग्राम
रेवाड़ी                 64400                             9203 किलोग्राम
भिवानी              170000                          12702 किलोग्राम
झज्जर                27200                             8309 किलोग्राम
फरीदाबाद          700                                  3346 किलोग्राम

इस प्रकार है हरियाणा आगे
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मध्य प्रदेश के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010-11 में मध्य प्रदेश में 7,26,000 हेक्टेयर भूमि पर सरसों की बिजाई की गई। इससे 1,128 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सरसों का उत्पादन हुआ। प्रदेश में 2011-12 के दौरान 5,11,000 हेक्टेयर भूमि पर सरसों की बिजाई की, जिससे 1,657 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर सरसों का उत्पादन हुआ। 2012-13 की रिपोर्ट में जहां मध्य प्रदेश में सरसाें का रकबा घटकर 7,84,000 हेक्टेयर रह गया है, वहीं अव्वल तीन राज्यों में शुमार राजस्थान में क्षेत्रफल 28.03 लाख हेक्टेयर से घटकर 23.25 लाख हेक्टेयर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में हरियाणा को भविष्य में पीली क्रांति के सिरमौर के तौर पर देखा जा रहा है।
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