यमुनानगर। चैत्र माह की प्रतिपदा के साथ ही शनिवार को नवरात्र का पर्व शुरू हो गया है। पहले दिन घरों में घट स्थापना के साथ मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की गई। इस दौरान देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
नवरात्र को लेकर लोगों ने अपने घरों, कार्यालय, प्रतिष्ठानों व अन्य स्थानों की सफाई कर गंगाजल से पवित्र किया। शनिवार सुबह पहले नवरात्र पर पूजन स्थल पर घट स्थापना की गई। पहले दिन श्रद्धालुओं ने पूजन स्थल पर घट स्थापना कर मां शैलपुत्री की पूजा की। वहीं दोपहर बार द्वितिया तिथि प्रारंभ हो गई। प्रतिपदा सुबह 11 बजकर 21 मिनट तक रही। जबकि इसके बाद द्वितिया तिथि लग गई। जिस कारण शनिवार को मां के दो स्वरूपों की पूजा की गई।
सुबह मां शैलपुत्री की पूजा की गई तो सांयकाल में मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति की गई। इस दौरान गलियों, चौराहों पर मां भवानी के जयघोष सुनाई दिए। वहीं मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही।नवरात्र के तीसरे दिन मां के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। ऐसा माना जाता है, माता रानी का तृतीय रूप चंद्रघंटा भक्तों पर कृपा करता है।
ऐसा है मां स्वरूप ऐसे करें पूजा
मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह है। मां के दस हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना अर्ध चंद्र इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। बूडिया निवासी पंडित एवं ज्योतिषाचार्य लतिल शर्मा ने बताया कि मां का यह रूप बेहद मंगलकारी है। नवरात्र में पूजन के लिए मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना उत्तम होता है। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित की जाती है।
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ऐसे पूजा कर करें मंत्र उच्चारण
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां चंद्रघंटा की पूजा में उपासक को सुनहरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। मां को खुश करने के लिए सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण की जाती है। इस दिन प्रात:कालीन स्नान इत्यादि से निवृत्त हो कर लकड़ी की चौकी पर मां की मूर्तिस्थापित करें। मां चंद्रघंटा को धूप, दीप, रोली, चंदन, अक्षत अर्पित करें। पंडित ललित ने बताया कि मां की पूजा के दौरान उनके मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। मंत्रोच्चार से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यदि एक माल मंत्र का जाप किया जाए तो विभिन्न प्रकार की सभी बाधाएं व शत्रुओं का नाश होता है।