त्योहारी सीजन में एकबार फिर कारोबारियों की आस जगी है। दीपावली को देखते हुए खासकर बर्तन कारोबार में अच्छे व्यापार की उम्मीद है। इसके लिए कामगारों के प्रबंधन के साथ व्यापारी हर जतन कर रहे हैं।
जगाधरी बर्तन उद्योग का सालाना टर्न ओवर करीब एक हजार करोड़ रुपये का है, लेकिन कोविड के बाद से यह 70 फीसदी तक गिर गया है। हालांकि कच्चे माल में बढ़ोतरी के चलते इस बार बर्तन महंगे हो गए हैं। ऐसे में खास कर पीतल, तांबा व स्टील के बर्तनों में तेजी रहेगी। उद्यमियों का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कोविड-19 के मामले पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। ऐसे में अब कामगार भी विभिन्न राज्यों से आने लगे हैं।
देशभर से ऑर्डर मिलने शुरू
जगाधरी में लगभग 1,500 सूक्ष्म, लघु और मध्यम धातु इकाइयां हैं, जो स्टेनलेस स्टील, एल्युमीनियम, पीतल और तांबे के बर्तन बनाती हैं। यहां के बर्तन उद्योगों के लिए दिल्ली का सदर सबसे बड़ा बाजार है। व्यापार का 60 फीसदी हिस्सा सदर बाजार पर टिका हुआ है। नवरात्र, दशहरा, धनतेरस व दीवाली के लिए दिल्ली के सदर बाजार समेत देश के अन्य बड़े शहरों से भी थोक के ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। उद्यमियों का कहना है कि ऑर्डर के हिसाब से उत्पाद क्षमता बढ़ा दी है, ताकि समय पर ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
कपालमोचन मेले से 10 करोड़ की आस
बिलासपुर के पास हर साल भरने वाले कपालमोचन मेले से जगाधरी बर्तन उद्योग को संजीवनी मिलती है। करीब एक सप्ताह तक चलने वाले इस मेले में आठ से दस लाख लोग आते हैं। मान्यता है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई न कोई बर्तन खरीद कर ले जाना होता है, जिससे घर में सुख समृद्धि आती है। उद्यमियों का कहना है कि कपालमोचन मेले से अकेले बर्तनों का आठ से 10 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। कई बार तो स्टॉक तक खत्म हो जाता है।
वर्जन
दी जगाधरी मेटल मेन्युफैक्चर्स एवं सप्लायर्स एसोसिएशन के सचिव सुंदर लाल बत्रा का कहना है कि जैसे-जैसे काम बढ़ेगा, वैसे-वैसे कर्मचारियों की संख्या भी औद्योगिक इकाइयों में बढ़ेगी। अनुमान लगाया जा रहा था कि त्योहार सीजन के दौरान हर श्रेणी के उद्योगों में नई भर्तियां बड़े स्तर पर होंगी। उद्योगों को सबसे बड़ा डर कोरोना की तीसरी संभावित लहर से थी। फिलहाल इस मामले में स्थिति काफी बेहतर है। इससे उद्यमियों को काफी राहत मिली है, हालांकि इस समय कई प्रकार की जटिल परेशानियों से उद्योग जगत को जूझना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल के रेट भी आसमान पर हैं, जिससे बर्तन बनाने की लागत काफी बढ़ गई है।