ब्रेन स्ट्रोक के बारे जानकारी देते डॉ. विवेक गुप्ता।
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यमुनानगर। हृदय रोग व कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के बाद मस्तिष्क आघात (ब्रेन स्ट्रोक) के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। बुजुर्ग के साथ युवा भी इसके शिकार बन रहे हैं। हालांकि उपचार में क्रांतिकारी बदलाव से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
यह बात फोर्टिस अस्पताल के इंटरवेंशन न्यूरोरेडयोलॉजी विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रो.विवेक गुप्ता ने कही। वह बुधवार को विश्व मस्तिष्क आघात दिवस व जीवन शैली सुधार को लेकर एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। डॉ. गुप्ता ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक दिमाग के किसी भाग में खून का प्रवाह रुकने, थक्का जमने या खून का दबाव बढ़ने के कारण रक्त वाहिका फटने से होता है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी से वे नष्ट होने लगती हैं। इसका असर सुन्नता, कमजोरी, चलने-फिरने व बोलने में परेशानी या लकवे के रूप में देखने को मिलता है।
उन्होंने बताया कि शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान, वसा यानी चिकनाई युक्त आहार, नशीले पदार्थ व बढ़ता वजन युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक का प्रमुख कारण है। शुरुआत में मामला संभाल लिए जाने पर मरीज स्वस्थ हो सकता है। विलंब होने पर यह जानलेवा हो सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को हर दिन कम से कम 20 से 30 मिनट चलना या साइकिल चलाना चाहिए। उन्होंने लोगों को ब्रेन स्ट्रोक (दिमागी दौरा) आने पर या शरीर को लकवा मारने पर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यदि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सकता है, तो मरीज की जल्दी स्वस्थ हो सकता है।