यमुनानगर। जिले में बिजली संकट गहराता जा रहा है। बुधवार रात भी बार-बार एक-एक घंटे के कट लगते रहे। हालात ऐसे हो गए हैं कि बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं है। कटों से परेशान लोग बिजली निगम के कंट्रोल रूम में फोन कर रहे हैं। बिजली गुल होने से संबंधित रोजाना 600 से 700 शिकायतें कंट्रोल रूम में आ रही हैं। अधिकारियों का तर्क है कि खतप के लिहाज से बिजली कम मिल रही है। जिस कारण कट लगाने पड़ रहे हैं। बार-बार बिजली गुल होने से आमजन के साथ जिले के उद्योगपति भी परेशान हो गए हैं, जो वीरवार सुबह डीसी से मिलने पहुंचे। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का जिला प्रतिनिधिमंडल डीसी पार्थ गुप्ता से मिला। इस दौरान डीसी को बिजली के अघोषित कट से उद्योगों को आ रही परेशानियों से अवगत कराया और ज्ञापन सौंपा।
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50 प्रतिशत तक घट गया बिजली उत्पादन
चैंबर के उपाध्यक्ष संत क्वात्रा व कोषाध्यक्ष आदित्य चावला ने डीसी को बताया की चाहे प्लाईवुड हो या मेटल समेत अन्य उद्योग अघोषित बिजली कट से काफी नुक़सान झेल रहे हैं। पहले ही लकड़ी की कमी व तेज रेट से प्लाईवुड उद्योग नुकसान में चल रहे हैं। उस पर बिजली के अघोषित कट लगने से परेशानी बढ़ गई है। चैंबर के प्रदेश महासचिव राज चावला ने कहा कि यमुनानगर में बहुत से ऐसे उद्योग हैं, जो 24 घंटे चलते हैं। इनमें प्लाईवुड यूनिट व मेटल यूनिट शामिल हैं। बार-बार बिजली के अघोषित कट लगने से उद्योगों में उत्पादन हानि भी होती है। उद्योगों में उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो गया है। जिला महासचिव सुमित गुप्ता व जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश सौंधी ने कहा कि उद्योगों को कम से कम एक दिन पूर्व बिजली कट को लेकर सूचित किया जाए, ताकि उत्पादन हानि कम से कम हो। यह सूचना बिजली विभाग द्वारा व्हाट्सएप या संदेश के माध्यम से विभिन्न औद्योगिक संगठनों तक पहुंचाई जानी चाहिए। डीसी ने सारी समस्या को संज्ञान में लेते हुए आश्वासन दिया कि वे खुद बिजली निगम के अधिकारियों से चर्चा कर जल्द समाधान करेंगे। मौके पर जिला उपाध्यक्ष संत कवात्रा, जिला कोषाध्यक्ष आदित्य चावला, प्रदीप गर्ग, जिला सचिव चिराग़ विनायक मौजूद रहे।
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48 घंटे से ज्यादा दिक्कत
बुधवार शाम बाद से वीरवार को दिनभर बिजली कटों से लोग परेशान रहे। जिन घरों व दफ्तरों में इनवर्टर थे, वो भी कुछ घंटे में जवाब दे गए। पंखे-कूलर व एसी, सब बंद होने पर लोग गर्मी में बेहाल रहे। एक तरफ अधिकतम तापमान 42 डिग्री पर पहुंच गया है तो दूसरी तरफ लोग बिजली कटों से बेहाल हैं। कटों का समय पता ना होने से लोग पेयजल का इंतजाम नहीं कर पाए, जिससे उन्हें घंटों गर्मी में पानी को भी तरसना पड़ा। बिजली निगम की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराने को दिए टोल फ्री नंबर भी काम नहीं आए।
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इन हालात की ये वजह
यमुनानगर सर्कल पर बीते वर्ष अप्रैल माह के अंत में 60 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली की मांग थी। पर्याप्त बिजली मिलने से अघोषित कट नहीं थे, किंतु इस बार बीते वर्ष की 60 लाख यूनिट बिजली की मांग बढ़कर 67 लाख यूनिट तक पहुंच गई है जबकि बिजली निगम के पास आपूर्ति के लिए 50-52 लाख यूनिट बिजली ही है। इस तरह मांग से करीब 15 लाख यूनिट कम बिजली उपलब्ध होने पर निगम अफसरों को बिजली के कट लगाने पड़ रहे हैं।
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27 अप्रैल को 52.24 लाख यूनिट की खपत:-
डिविजन ग्रामीण शहरी इंडस्ट्री कुल
यमुनानगर 7.76 13.35 4.61 25.72
जगाधरी 6.06 8.98 3.10 18.14
बिलासपुर 6.75 1.22 0.41 8.38
(बीते वर्ष 27 अप्रैल को 59.58 लाख यूनिट आपूर्ति थी। )
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वर्जन
अभी अर्बन क्षेत्र में 21 घंटे, ग्रामीण में 18 व कृषि में तीन घंटे आपूर्ति हो पा रही है। मांग से कम बिजली उपलब्धता की वजह से बिजली के कट लगाने पड़ रहे हैं। जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
- राजेंद्र कुमार, एसई बिजली निगम।