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सिक्के के शौक ने बना दिया तैराक, अब लोगों की जिंदगियां बचा रहा है गोताखोर राजीव

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The hobby of coins has made a swimmer, now diver Rajiv is saving lives of people - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। नहर से सिक्के निकालने के शौक में तैराक बना। फिर इसी हुनर से पानी में डूबने वालों की जान बचाने का जज्बा पैदा हुआ। इसी जज्बे के चलते तीर्थनगर निवासी 34 वर्षीय राजीव गोताखोर के रूप में कार्य करते हुए अब तक 700 लोगों की जान बचा चुका है। उनके नहर-नदियों से निकाले अनगिनत शवों को भी अपनो के हाथों मुखाग्नि मिल पाई। पानी में डूबते लोगों को बचाने व शवों को निकालते राजीव के हाथ कई आपराधिक मामलों से जुड़े सबूत लगे, जिससे वे पुलिस के भी मददगार बने हुए हैं।
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राजीव ने बताया कि उसने तैराकी का हुनर उस्ताद सुखराम से सीखा। जिन्हें बचपन से पश्चिमी यमुना नहर में डूबते लोगों को बचाते व शवों को निकालते देखा। सुखराम नहर से सिक्के भी निकालते थे, जिन्हें देख 14 साल की उम्र में शुरुआत में नहर के किनारे ही सिक्के निकालने लगा। उसे देख सुखराम ने तैराकी के गुर दिये। फिर नहर के बीच जाकर सिक्के निकाले। तीन-चार साल ऐसा कर 18 की उम्र में सुखराम के साथ पानी में डूबते लोगों को बचाने व शव निकालने में लग गया। बीते 18 वर्षों में यमुनानगर के अलावा कुरुक्षेत्र, पानीपत, दिल्ली सहित यूपी व पंजाब के अलग-अलग शहरों में डूबे लोगों के रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा बना। अब तक नहर-नदियों से 700 लोगों को जिंदा बाहर निकालकर जान बचाई। अनगिनत शव भी निकाले।
बेशकीमती सिक्के, चोरी के एटीएम व बाइक लगे हाथ
राजीव ने बताया कि पानी में डूबते लोगों को बचाने व शवों को बाहर निकालते समय चोरी की बाइक, एटीएम जैसे अन्य कई आपराधिक मामलों के सबूत हाथ लग चुके हैं। जिन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। उसके पास बचपन से अब तक नहर से मिले सिक्कों के कई प्लास्टिक बैग भर चुके हैं, जिसमें सामान्य सिक्कों के साथ कई बेशकीमती सिक्के भी हैं। सामान्य सिक्के वह चला देता है, पर प्राचीन व विदेशी सिक्के संभाल कर रखता है।
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इस काम से परिवार रोकता, पर ले आया साढ़े चार की किट
राजीव ने बताया कि वह जो काम कर रहा है, उसमें उसकी जान भी जा सकती है। कई बार जिसे बचाने जाते है वही खुद को बचाने में उन्हें पानी में नीचे धकेल देता है। कई बार खुद की जान पर भी बनी। घर पर पिता हरीश, माता गीता, पत्नी व दोनों बेटियां यह काम करने से उसे रोकते हैं। किंतु मदद के लिए आई कॉल पर वह न नहीं कर पाता। जान का जोखिम कम करने के लिए खुद के रुपयों से साढ़े चार लाख रुपये की डाइविंग किट व ब्रिदिंग एयर प्रेशर ले आया है। इससे वह अधिक समय तक पानी के नीचे रेस्क्यू कर पा रहा है।
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