इस सत्र में 134 ए के तहत दाखिला प्रक्रिया काफी देरी से शुरू हुई। निजी स्कूल पहले ही इसके विरोध में थे। प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही स्कूल प्रबंधकों की ओर से सत्र समाप्ति का हवाला देकर दाखिला देने से मना कर दिया था। स्कूलों की इस मनमानी के बाद अब जिला शिक्षा विभाग कार्रवाई के मूड में है। विभाग की ओर से इसकी रिपोर्ट बनाकर निदेशालय व सरकार को भेज दी है। विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
इस सत्र में 134 ए के तहत दाखिला प्रक्रिया काफी विलंब से शुरू हुई। अधिकांश स्कूल इसके वार्षिक परीक्षा शुरू होने का इंतजार करते हुए विभिन्न बहानों से दाखिले लटकाते रहे। जिससे प्रक्रिया में और देरी हुई। वहीं फरवरी माह में दूसरे चरण की जारी सूची के दौरान भी स्कूलों ने ऐसा ही किया। अभिभावकों ने इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी व जिला प्रशासन से भी की। इसे लेकर डीसी ने निजी स्कूल प्रबंधकों को नियम के तहत दाखिले देने के निर्देश भी दिए थे। डीसी ने प्रबंधकों से कहा था कि वे पहले से ही उनके स्कूल में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को नियम के तहत समायोजित करें। ऐसे विद्यार्थियों से केवल ट्यूशन फीस ही ली जाए। उस दौरान स्कूल प्रबंधकों ने इस पर अमल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसे लटकाते रहे। वहीं अब सभी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में दाखिले को औचित्य ही नहीं रह जाता है। विभाग की ओर से इसकी रिपोर्ट बनाकर निदेशालय व सरकार को भेज दी है। विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है। परंतु सरकार व निदेशालय की ओर से अभी तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
करीब चार सौ पात्र विद्यार्थी लाभ से वंचित
निजी स्कूल 134ए के तहत दाखिला देने में रुचि नहीं दिखाते हैं। इस सत्र में यह प्रक्रिया बेहद देरी से शुरू हुई। ऐसे में निजी स्कूल पहले ही इसे लेकर आनाकानी कर रहे थे। अभिभावकों के प्रदर्शन और विभाग की दखल के बाद कुछ विद्यार्थियों को दाखिला मिला, लेकिन फिर भी पात्र इससे वंचित रह गए हैं। दूसरे चरण में मात्र 141 को ही दाखिला दिया जा सका है। जबकि 400 से ज्यादा पात्र विद्यार्थियों इससे वंचित रह गए हैं। इस सत्र में 134ए के तहत कुल करीब 2050 विद्यार्थियों की सूची जारी हुई थी।