ट्विनसिटी (यमुनानगर-जगाधरी) में शाम ढलते मुख्य मार्गों से लेकर गलियों में अंधेरा हो जाता है। इसका कारण यह है कि इनमें एक तो जरूरत से कम स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, दूसरा यह कि जो लगी हैं उनमें से भी 30 फीसदी बंद पड़ी हैं। हालांकि चार वर्षों से नगर निगम की हर सदन बैठकों में स्ट्रीट लाइट का मुद्दा उठा, बावजूद इसके अफसर व्यवस्था नहीं सुधार पाए हैं।
बैठकों में कई बार वार्डों को नई लाइटें देने के प्रस्ताव पास हुए, पर आठ वार्डों को छोड़ अन्य 14 वार्डों में नई एलईडी लाइटें नहीं लगी। स्थिति यह है कि आठ वार्डों व मुख्य मार्गों पर लगी नई एलईडी व अन्य 14 वार्डों में पुरानी सोडियम व ट्यूब लाइटें लगातार खराब हो रही हैं। वार्ड पार्षदों की मानें तो वार्डों में लगी लाइटें जरूरत से 50-60 फीसदी कम हैं, उनमें भी 30 फीसदी बंद हैं। आरोप है कि खराब लाइटों की मरम्मत सहित तीन माह पहले आई नईं 1056 एलईडी लाइटों लगाने को भी नगर निगम के पास सामान नहीं हैं। इसी लचर प्रणाली में लड़खड़ाती स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का खामियाजा शहरवासी भुगत रहे हैं।
मार्च-2020 में वार्ड-2, 6, 8, 9, 10, 15, 19 व 21 में एलईडी लाइटें लगाने का चार करोड़ रुपये का टेंडर हुआ। इन आठ वार्डों में सितंबर-2021 तक 8164 एलईडी लाइटें लगीं। उनमें भी कई लाइटें बंद व खराब पड़ी हैं, उधर अन्य 14 वार्ड नई एलईडी लाइटें लगने की बाट जोह रहे हैं।
15 नवंबर 2022 की सदन बैठक में हर वार्ड के लिए 250-250 एलईडी स्ट्रीट लाइट लेने का प्रस्ताव पास हुआ, पर कार्रवाई कागजों में अटकी है। पार्षदों की मानें तो वार्डों में यह लाइटें नहीं लगीं। पहले भी सदन बैठकों में ऐसे कई प्रस्ताव पास हुए, पर धरातल पर काम नहीं लगा।
वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि जिन सड़कों पर पहले से एलईडी व ट्यूब लाइटें लगी हैं, उन पर करोड़ों रुपये खर्च कर डेकोरेटिव लाइटें लगाई जा रही हैं। जबकि एलईडी लाई प्रोजेक्ट में कवर आठ वार्डों को छोड़ अन्य 14 वार्डों में लगी पुरानी सोडियम व ट्यूब लाइटें जरूरत से 50-60 फीसदी कम हैं और उनमें भी 30 फीसदी बंद हैं। जिन पर अफसरों का ध्यान नहीं है।
वार्ड-तीन से पार्षद हरमीन कोहली ने कहा कि चार वर्षों में नई लाइटें नहीं लगी और खराब हो रही पुरानी लाइटें भी रिपेयर नहीं हो रहीं। शाम होते ही अंधेरा हो जाता है, जिसमें आपराधिक घटनाओं की आशंका में घरों से निकलने में भय रहता है। ऐसे ही बिना नई लाइट मिले चार दिवाली निकल गई। सदन बैठक में मोमबत्ती दिखा विरोध भी किया, तब भी सुधार नहीं हुआ।
करीब 1056 एलईडी लाइटें वर्ष-2014 की सेंशन थी, जो जनवरी-2023 में आई। उन्हें लगाने के लिए पाइप, कलम्प व अन्य सामान लेने के लिए टेंडर होगा। जिसका प्रपोजल भेज दिया है। पुराने लाइटों की मरम्मत का कार्य भी किया जा रहा है।- विकास धीमान, एक्सईएन, नगर निगम।