संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सिविल अस्पताल के सामने शशि महल में इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से करवाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम व त्याग के बारे में बताया गया। कुरुक्षेत्र इस्कॉन मंदिर से आए कथा वाचक साक्षी गोपाल दास महाराज ने कहा कि मंत्रों की शक्ति बड़ी महान है। सूरदास जी कहते हैं जिस पर भगवान कृपा करते हैं। उसे मनुष्य योनि देकर इस भौतिक संसार में भेजते हैं।
उन्होंने कहा कि मानव योनि का एकमात्र लक्ष्य है कि मुझे भगवान श्री कृष्ण की भक्ति कर उनके धाम जाना है। शुद्ध भक्तों के संग में रहकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लग जाना है। जो धर्म का पालन करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। सबसे बड़ा धर्म भगवान कृष्ण की भक्ति करना है। यदि कोई भवबंधन से मुक्ति चाहता है तो उसे ऐसे मनुष्य का संग छोड़ देना चाहिए।
हमें अपनी इंद्रियों को संसार के विषय भोगों में नहीं लगाना चाहिए। हमें अपने मन को भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में लगाना चाहिए। चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कि बिना किसी भौतिक इच्छा के भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भौतिक इंद्रियों से हम भगवान को नहीं पा सकते, जब तक अपनी इंद्रियों को भगवान की सेवा में लगा कर उनको शुद्ध न कर ले। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी इंद्रियों से भगवान का नाम, गुण, लीलाओं का रास्वादन करें और जो भी खाए भगवान को भोग लगाकर प्रसाद खाएंगे, तो जल्दी हमें हमारे अंदर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति जल्दी जाग जाएगी।
कथावाचक ने कहा कि एकांत स्थान भी सुरक्षित नहीं है जब तक वहां अच्छे भक्तों की संगति न मिले। एकांत में भक्ति नहीं होती। जितना हम शुद्ध भक्तों के संग में रहेंगे, हमारी भक्ति उतनी ही बढ़ेगी। हमें सद्गुरु ग्रहण करके हम उनसे भक्ति रूपी कुंजी को लेकर भगवान को देख सकते हैं। विषय भोगों का कोई अंत नहीं है कि शुद्ध वैष्णव का कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए, यह एक अपराध है। यदि हम किसी वैष्णव का सम्मान नहीं कर सकते, तो उनका अपमान भी नहीं करना चाहि कथा का शुभारंभ मुख्यातिथि शेरी गुप्ता, कपिल गुप्ता, मीना गर्ग, नरेश गर्ग, रिया गर्ग, रमन गर्ग, स्वीटी गर्ग, पवन गर्ग, सुदेश गाबा, अशोक गाबा, बृजेश् ागर्ग, राजेश गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।