यमुनानगर। मानसून आने में कुछ दिनों का समय शेष है। उधर जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम के अफसर नालों की सफाई कराने में जुटे हैं लेकिन उनकी यह कोशिश समय से पहले सफल होती नहीं दिख रही है। क्योंकि जलभराव की बड़ी वजह बनने वाले अधिकांश नाले साफ न होने से जाम पड़े हैं, वहीं बारिश से पहले कई सड़कें व नाले-नालियां भी निर्माण के लिए खोद डाली हैं। इन निर्माण कार्यों समेत नालों की सफाई में आगामी दिनों में बारिश भी रोड़ा बनेगी। ऐसे में देरी से शुरू हुई नालों की सफाई समेत सड़कों व निकासी के कार्य राहत के बजाय शहर में जलभराव की मुसीबत बढ़ाएंगे।
एक बार में भी नाले नहीं साफ : जोन-1 में 50 व जोन-2 में 90 फीसदी काम बाकी
मानसून से पहले हर साल नालों की तीन चरण में सफाई होती है, पर इस बार अफसरों ने इसके टेंडर करने में देरी की। वर्क अलॉट होने पर जोन-1 में वार्ड-1 से 7 के 12 नालों पर जून के पहले सप्ताह व जोन-2 के वार्ड-8 से 22 के 27 नालों पर सफाई का काम गत सप्ताह ही शुरू हुआ है। निगम अफसरों का दावा है कि जोन-1 में 50 फीसदी नालों की सफाई पूरी हो चुकी है। जबकि हकीकत यह है कि नाले तीन बार साफ करने हैं, यानी अभी पहली बार में ही नालों की सफाई का काम 50 फीसदी पूरा और 50 फीसदी अधूरा है। जबकि जोन-1 से दो गुना बड़े जोन-2 में यह काम 10 फीसदी ही हुआ। हालात ये हैं कि जोन-1 में 50 फीसदी नाले सफाई से अछूते हैं और साफ किए नालों में भी फिर से गंदगी होने लगी हैं जबकि जोन-2 के अधिकांश नाले जाम पड़े हैं।
बारिश से ऐन पहले खोद दिए पुुराने एनएच-73, सड़कें-गलियां व नाले-नालियां
जगाधरी बस स्टैंड से जम्मू कॉलोनी एसटीपी तक स्टॉर्म वाटर ड्रेन बरसात से पहले पूरी नहीं हो पाएगी। ड्रेन से जगाधरी के बड़े नाले का पानी शहर के अंदर से न ले जाकर बाहर से निकाला जाना था। एनएच-73 पर कन्हैया साहिब चौक से महाराणा प्रताप चौक तक लाइन डालने को खुदाई कर डाली है, वहीं ड्रेन के काम में कई पेंच बाकी हैं। ऐसे ही कई सड़कें-गलियों व नाले-नालियां निर्माण के लिए खोद छोड़ दिए हैं। ये अधूरे काम भी बारिश में जलभराव की मुसीबत बढ़ाएंगे।
1200 लोहे के पोल व सैकड़ों सूखे पेड़ों का भी खतरा
शहर में बिजली के 1200 लोहे के पोल हैं। इनमें 600 लोहे के पोल अकेले जगाधरी में हैं। इन पोल से बिजली की 11केवीए के तार गुजर रहे हैं। इनमें कई पोल ऐसे जगह हैं, जहां जलभराव होता है। कई पोल से पशु करेंट की चपेट में भी आ चुके है। इन्हें हटाकर सीमेंट के पोल लगाने के लिए पूर्व में मंत्री व अधिकारी आदेश दे चुके हैं, बावजूद यह काम बजट के पेंच में पूरा नहीं हुआ। ऐसे ही शहरी सड़कों किनारे झुके खड़े कई हादसों की वजह बन चुके सैकड़ों पेड़ों का भी खतरा बरकरार है।
शहर में जलभराव से बचाव के लिए नालों की सफाई का काम लगातार जारी है। इसके साथ निगम के अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी संबंधित अफसरों व ठेकेदार को काम जल्द पूरा करने के निर्देश हैं।
- आयुष सिन्हा, कमिश्नर, नगर निगम।