माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। दशलक्षण पर्व के शुभारंभ पर जिले के जैन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच विधानों का आयोजन किया गया। महावीर दिगंबर जैन मंदिर में कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर संरक्षक आरके जैन व गिरिराज स्वरूप जैन ने की और संचालन मध्यप्रदेश से आए विधानाचार्य नितिन कुमार शास्त्री और शीलचंद जैन ने किया। इस अवसर पर मुकेश जैन ने कहा कि पर्यूषण पर्व हमें जीवन में अनुशासन, मर्यादा, संयम और त्याग की शिक्षा देता है। जीवन में नए उत्साह की किरण उत्पन्न करता है।
विधानाचार्य नितिन कुमार शास्त्री ने बताया कि पर्यूषण की महत्व से परिचित होने के लिए अंतर-आत्मा की गहराई तक पहुंचने की आवश्यकता होती है। पर्युषण पर्व जैन धर्म का आध्यात्मिक पर्व है। उन्होंने कहा कि जो चारों तरफ से अज्ञान के ताप से बचाए उसे ही पर्युषण कहते है। जिस प्रकार संसार में कुल दस दिशाएं हैं, उसी प्रकार हमारी आत्मा के चारों तरफ उत्तम, क्षमा, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य आदि दिशाएं हैं। क्षमा जीवन की धरती है और ब्रह्मचर्य जीवन का आकाश है। धरती किसी पर भी क्रोध नहीं करती, आकाश किसी को स्थान देने से मना नहीं करता, उसी प्रकार धर्म का प्रभाव क्षमा से होता है।
मंदिर के संरक्षक आरके जैन ने बताया कि आत्म स्वभाव भूत उत्तम क्षमा आदि दस धर्मों के माध्यम से क्षमा से शुरू होकर क्षमा तक पहुंचाता है। गिरिराज स्वरूप जैन ने कहा कि यह पर्व क्षमा से प्रारंभ होकर मंदिर के कलश के समान ब्रह्मचर्य तक पहुंचाकर आत्मा को पूज्य और पवित्र बना देता है। उन्होंने कहा कि बाहर के साथ हमारी आंतरिक शुद्धि भी आवश्यक है। पर्व के लिए मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। इस मौके पर प्रधान अजय जैन, महामंत्री पुनीत जैन, सहसचिव मुकेश जैन, नितिन जैन, आनंद प्रकाश जैन, पवन जैन, दीपक जैन, अंकित जैन, सुनील जैन, विवेक जैन, अंकुर जैन, विकास जैन, सुमन जैन, मंजू जैन, स्नेहलता जैन मौजूद रहे।