रादौर स्थित कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की संचालिका 97 वर्षीय तारा बहल का जीवन गांधी जी से एक मुलाकात के बाद बदल गया। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने समाज सेवा का रास्ता पकड़ लिया और अपने साथ अन्य लोगों का जीवन संवारने की भूमिका अदा की। तारा बहल ने बताया कि गांधी जी की बस हल्की सी झलक उन्होंने देखी थी और बापू कहकर उन्हें आवाज लगाई, गांधी जी ने हल्की सी मुस्कान के साथ उनकी तरफ देखा। यह मुलाकात छोटी भले थी, लेकिन वह सारी उम्र इस मुलाकात को नहीं भूल सकेंगी। आज वह गांधी जी की विचारधारा से महिलाओं की जिंदगी संवार रही हैं।
तारा बहल मूलरूप से छत्तीसगढ़ के जिला बलोद के दुर्ग की रहने वाली हैं। तारा बहल अपने भाई स्वतंत्रता सेनानी डॉ. बैजनाथ के साथ महात्मा गांधी से मिलने गई थी। 104 वर्षीय बैजनाथ इन दिनों अमृतसर में रह रहे हैं। देश को आजाद कराने में हुए आंदोलनों में वह महात्मा गांधी के साथ रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नागपुर में हुई। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएसई व लाहौर से भी उच्च शिक्षा ली। तारा बहल ने 1947 में पंजाब के कपूरथला के हिंदू पुत्री पाठशाला में पढ़ाना शुरू किया। वह 1982 में पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग से डिप्टी डेवलेपमेंट कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हुईं।
वर्ष 1984 से तारा बहल रादौर के कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की देखरेख कर रही है। आश्रम बनने के समय रादौर हरियाणा नहीं, बल्कि पंजाब प्रांत का हिस्सा था। इस आश्रम की पहली संचालिका जवाहर लाल नेहरू की चाची रामेश्वरी नेहरू थीं। सरकार द्वारा इसी आश्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिलाया जाता है। इसके अलावा काफी संख्या में महिलाएं यहां से सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण ले चुकी हैं। इसके साथ ही अहिंसा व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अन्य विचारों का भी प्रचार-प्रसार करने में जुटी हैं।
तारा बहल ने बताया कि उन दिनों राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नागपुर के दौरे पर थे। बड़े भाई डा. बैजनाथ उनसे मिलने के लिए जाने वाले थे। तब वह भी जिद करके उनके साथ नागपुर जाने को तैयार हो गई। उस वक्त उनकी उम्र मात्र 16 साल थी। तारा बतातीं हैं कि जब उन्होंने गांधी जी को देखा था उस क्षण को वह ताउम्र याद रखेंगी। वह पल उनके लिए जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से मिलने के बाद उनकी विचारधारा में परिवर्तन आया और वह बापू की अहिंसा व अन्य विचारधाराओं को समाज के जन-जन तक पहुंचाने में लग गईं।
आश्रम में महात्मा गांधी के चरखे से लेकर उनकी जुटाई गईं वास्तविक 100 तस्वीरों का संग्रहालय भी है। सभी तस्वीरें महात्मा गांधी के जीवन व उनके संघर्षों को याद दिलाती हैं। विशेष अवसरों पर यहां अन्य प्रदेशों से भी लोग आते हैं। इस संग्रहालय को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।
आश्रम में 1988 से रह रही रादौर निवासी सुखवर्षा ने बताया कि 97 वर्ष की आयु में भी तारा बहल पूरी तरह से स्वस्थ हैं। अच्छी तरह से सुन व अंग्रेजी में बात कर लेती हैं। मौसम चाहे कोई भी हो वह रोजाना स्नान करती हैं और अपने कपड़ों को खुद धोती हैं। सुबह 10 बजे उठने के बाद स्नान आदि कर तैयार होती हैं। दोपहर को तीन बजे के बाद ही उनसे मिला जा सकता है। अंग्रेजी दवाई का कभी सेवन नहीं करती।