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गुस्साए वेंडरों ने लगाया जाम, बोले- वेंडिंग जोन में नहीं लगाएंगे रेहड़ी

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शुक्रवार को यमुनानगर वेंडिंग जोन में रेहड़ियां लगाने वाले लोग सड़क पर उतर आए। रेहड़ी लगाने वालों ने वर्कशॉप रोड पर जाम लगा दिया। जाम लगाने वालों में वह दुकानदार भी शामिल थे जिनके दुकानों के बाहर अतिक्रमण करने के आरोप में चालान काटे गए थे। रेहड़ी लगाने वाले लोगों ने बताया कि थाने के सामने जो वेंडिंग जोन बनाया गया है उसमें कुछ भी सुविधा नहीं है। छह दिन में उनका काम बुरी तरह से चौपट हो गया है। ऐसे में वह अब वेंडिंग जोन में रेहड़ी लगाकर सामान नहीं बेचेंगे। इस दौरान कई दुकानदारों ने जबरन वाहनों को रोक दिया। जाम से सड़क पर दूर तक लंबा जाम लग गया। थाना शहर यमुनानगर से एसआई दल सिंह दुकानदारों से बात करने पहुंचे। करीब दो घंटे तक ऐसा ही चलता रहा। इसके बाद उन्होंने सड़क को खाली कर दिया।
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थाना शहर यमुनानगर के सामने बनाए गए वेंडिंग जोन के वेंडर प्रदर्शन करते हुए भगत सिंह चौक की तरफ गए। जब वह पेपर मिल गेट के सामने पहुंचे तो कुछ दुकानदारों ने वेंडरों को सड़क पर जाम लगाने को कहा। जिस कारण निगम कार्यालय जा रहे वेंडर सड़क के बीच में बैठ गए। जाम लगाने को लेकर वेंडर दो गुटों में बंट गए। उन्होंने जाम लगाने से मना कर दिया और वह प्रदर्शन करते हुए महिला थाने के पास खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद वह इनेलो के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के कार्यालय में पहुंच गए। जहां पर दिलबाग सिंह ने उनसे बात की और उनकी बात सुनते हुए उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया। पेपर मिल गेट के सामने आम आदमी के कुछ नेता भी वहां माइक लेकर पहुंच गए। जिन्होंने प्रदेश सरकार पर गरीबों को परेशान करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।
रेहड़ी पर सामान बेचने वाले अखिलेश, पवन, सुदेश व छोटू राम ने बताया कि वह सड़क पर खड़े होकर सामान बेचते हैं तो पुलिस उनका चालान काटती है। उनके लिए थाना शहर यमुनानगर के सामने वेंडिंग जोन बनाया गया है परंतु वहा न पानी है और न ही छत पर छाया का प्रबंध। यहां तक की शौचालय भी अब तक अधूरे पड़े हैं। छह दिनों से उनका काम खत्म हो गया है। पहले कोरोना ने मारा और फिर महंगाई ने।
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प्रदर्शन कर रहे दुकानदार शिवम मल्होत्रा, गौरव अरोड़ा व अरूण धमीजा ने कहा कि यदि वह दुकान के बाहर एक डस्टबिन भी रखते हैं तो उसका भी छह हजार रुपये का चालान काट दिया जाता है। उन्हें दुकानों के बाहर चार फुट के बरामदे में भी सामान नहीं रखने दिया जाता। वह इस बारे में मेयर से भी मिले थे। निगम में जितने अफसर हैं उन्होंने अपने हिसाब से अलग-अलग नियम बना रखे हैं। अधिकारी शहर में वाहन पार्किंग की व्यवस्था तो करवा नहीं सके उल्टा उन पर ही जुर्माना लगाया जा रहा है।
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