यमुनानगर के थर्मल प्लांट की एक यूनिट बंद कर फिलहाल उसकी मरम्मत और ओवरहालिंग की जा रही है, जो 20 अक्तूबर तक संचालन में आएगी। वहीं दूसरी यूनिट के लिए स्टॉक में केवल नौ दिन का कोयला बचा हुआ है। 20 अक्तूबर के बाद दूसरी यूनिट शुरू होने पर कोयले का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि थर्मल में सोमवार तक 75000 मीट्रिक टन कारपेट कोयला उपलब्ध है, जो यूनिट को अगले 15 दिनों तक चलाने के लिए पर्याप्त है।
यमुनानगर स्थित दीनबंधू सर छोटू राम थर्मल पावर प्लांट में 300-300 मेगावाट की दो बिजली उत्पादक यूनिट हैं। कोयला संकट के चलते बिजली संकट खड़ा न हो, इसके लिए डीसी पार्थ गुप्ता ने सोमवार को थर्मल पावर प्लांट का निरीक्षण किया। डीसी ने थर्मल पावर प्लांट में उपलब्ध कोयले के स्टॉक को भी जांचा। साथ ही बिजली उत्पादन की प्रक्रिया को देखने के लिए प्लांट के टरबाइन, बॉयलर व कंट्रोल रूम क्षेत्र का दौरा किया। इस मौके पर जगाधरी एसडीएम सुशील कुमार, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के कार्यकारी अभियंता, थर्मल प्लांट के जेपी धीमान, लखविंद्र सिंह, काबुल सिंह मौजूद रहे।
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बारिश ने बिगाड़ी सप्लाई चेन
थर्मल अधिकारियों का कहना है कि इस साल सितंबर के महीने में कोयला उत्पादन करने वाले क्षेत्रों में भारी बारिश होने की वजह से कोयले की खोदाई और ढुलाई बाधित हुई है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के कई कोल खदानों में पानी भर जाने की वजह से कई दिनों तक काम बंद रहा। इस वजह से भी कोयले का उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हुआ है।
थर्मल पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर आरके वर्मा ने बताया कि एक इकाई कारपेट कोयले से चल रही है। दूसरी यूनिट की मरम्मत चल रही है। उसके 20 अक्तूबर तक चलने की संभावना है। फिलहाल करीब 15 दिन के लिए कोयला पर्याप्त मात्रा में है। तब तक नया रैक लग जाएगा।
डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि प्लांट के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिजली उत्पादन में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। शहरवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है। थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कोई कमी नहीं है और न ही भविष्य में आने दी जाएगी।