मोहनलाल सेठी अपनी चार पीढ़ियों के संग एक ही घर में रहते हैं। उन्होंने बताया कि वे 1946 में पाकिस्तान से आकर यहां बस गए थे। इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन के न सिर्फ वह गवाह रहे हैं बल्कि उसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लिया। उससे जुड़ी तमाम यादें आज भी उनके जेहन में कायम है।
उम्र ढल गई, कमर झुक गई, आंख और कान जवाब देने लगे हैं पर लोकतंत्र के उत्सव का उत्साह कम नहीं हुआ। बात हो रही है जगाधरी शहर की इंदिरा मार्केट कॉलोनी निवासी 107 वर्षीय मोहन लाल सेठी की जो 25 मई को एकबार फिर मतदान के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि 1952 से वे लगातार अपने मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे हैं।
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मोहनलाल सेठी अपनी चार पीढ़ियों के संग एक ही घर में रहते हैं। उन्होंने बताया कि वे 1946 में पाकिस्तान से आकर यहां बस गए थे। इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन के न सिर्फ वह गवाह रहे हैं बल्कि उसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लिया। उससे जुड़ी तमाम यादें आज भी उनके जेहन में कायम है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 को जब आजादी मिली तो हर तरफ जश्न मनाया गया। उस दौरान जगाधरी के झंडा चौक (नगर निगम कार्यालय के सामने) पर पहली बार ध्वजारोहण किया गया था।
तब वहां उनके सहित कुल चार लोग ही थे, जिसमें दो नगर पालिका के कर्मचारी थे। लोगों को बंटवारे में अपनों को खोने का दुख था। इसके बाद 1952 में जब चुनाव हुआ तो वे भी मतदान के लिए गए थे। पहली बार मतदान केंद्र पुरानी एसडीएम कोर्ट के पास बने सरकारी भवन के कमरों में बना था। लोगों को मतदान का महत्व नहीं पता था। धीरे-धीरे समय बदला तो यह लोकतंत्र का उत्सव बन गया। मोहन लाल कहते हैं कि वो 25 मई को जरूर मतदान करेंगे। बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं।