यमुनानगर। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी की पूजा की गई। सुबह से ही मंदिरों में दर्शन को श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। लोगों ने उपवास रख परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के शहर के जगाधरी वर्कशॉप स्थित आईटीआई के नजदीक श्री ज्वाला जी मंदिर, शांति कॉलोनी स्थित रामजी की कुटिया मंदिर, जगाधरी श्री देवी भवन मंदिर, गांव भाटली स्थित मां दुर्गा मंदिर आदि जगहों पर सुबह से दर्शनार्थियों का आना शुरू हो गया था।
गांव ऊंचा चंदना के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित पुरुषोत्तम दास ने बताया कि नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानि तप का आचरण करने वाली बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। नारद जी के आदेशानुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने वर्षों तक कठिन तपस्या की। अंत में उनकी तपस्या सफल हुई। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की प्राप्ति होती है।
नवरात्र के दूसरे दिन भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। जय मां अंबे के जयकारों से मंदिर गूंज उठे। दूसरे दिन मां के दूसरे रूप ब्रह्मचारिणी का पूजन किया गया। इस बीच मंदिरों में दिनभर मां की आरती व भजन-कीर्तन का सिलसिला चलता रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग मंदिर में दर्शन करने के लिए लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। इसके बाद सुबह चार बजे पहली आरती हुई। इस बीच दिन में हवन व अन्य आयोजन भी चलता रहा। मंदिर में चल रहे नवरात्र महोत्सव में मां का भव्य दरबार सजाया गया है। भजन गायकों ने मां की एक से बढ़कर एक भेंट सुनाई। पुजारी पंडित पुरुषोत्तम दास ने बताया मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देता है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। उन्होंने ढोल-नगाड़े बजाकर आरती की और सुख-समृद्धि की दुआएं मांगीं। इस दौरान मंदिरों में भंडारे भी लगाए गए जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।