यमुनानगर। नगर निगम द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों पर निगरानी कमेटी ने सवाल उठाए हैं। निगरानी कमेटी के सदस्य न तो निगम अधिकारियों द्वारा कराई जा रही सफाई व्यवस्था से खुश हैं और न ही स्ट्रीट वेंडिंग जोन में स्ट्रीट वेंडरों को शिफ्ट करने से। अधिकारियों द्वारा जो कार्य किए जा रहे हैं उनकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजने की तैयारी निगरानी कमेटी के पदाधिकारियों ने कर ली है।
कमेटी के पदाधिकारियों और भाजपा नेताओं ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक की। इस मौके पर काफी देर तक अधिकारियों द्वारा कराए जा रहे कार्यों पर चर्चा की गई। बैठक में शहर में रेहड़ी पर सामान बेच कर अपना परिवार पालने वाले स्ट्रीट वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने पर भी काफी देर तक चर्चा की गई। कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा सभी लोगों को स्वेच्छा से कोई भी कार्य करने का अधिकार है। वेंडर भी उसी का हिस्सा है। वह भी अपना सामान बेच रहे हैं।
वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने की एक प्रक्रिया है जिसका पालन निगम अधिकारियों ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करना है तो उसके लिए पहले 60 दिन का नोटिस देना होता है। परंतु यहां ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा थाना शहर के सामने वेंडिंग जोन के पास किए गए निर्माण को भी गलत बताया गया है। क्योंकि यह ग्रीन बेल्ट है।
कूड़ा उठाने वाले एजेंसी पर नहीं लगाया जुर्माना
निगरानी कमेटी के पदाधिकारी गिरीश पुरी, डॉ. हर्षवर्धन शर्मा ने बताया शहर में घरों से कूड़ा उठाने के लिए जिस एजेंसी को ठेका दिया गया था उसने अपना काम ठीक से नहीं किया। ठेकेदार बीच में ही काम छोड़ कर चला गया। नियमित रूप से घरों से कूड़ा भी नहीं उठाया गया। ऐसे में निगम अधिकारियों को ठेकेदार पर जुर्माना लगाना चाहिए था परंतु उल्टा उसे पेमेंट कर दी गई। इसके अलावा शहर की कॉलोनियों में सफाई भी ठीक से नहीं हो रही। इसकी रिपोर्ट बनाकर जल्द ही मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को सौंपी जाएगी।
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इन मुद्दों पर कानूनी राय लेने की जरूरत
गिरीश पुरी ने कहा कि कन्हैया साहिब चौक के पास गोबिंदपुरी में नगर निगम कार्यालय के ऊपर करोड़ों रुपये से भवन का विस्तार किया जाना है। परंतु वहां धन खर्च करने से पहले निगम अधिकारियों को कानूनी राय लेनी चाहिए, क्योंकि गोबिंदपुरी के लोग इस जगह को लेकर केस कर चुके हैं जिसमें निगम की हार हुई है। इसलिए वह जगह निगम की न होकर स्थानीय लोगों की घोषित हुई है। इसी तरह गोबिंदपुरी में पंचायत भवन के पीछे जहां निगम का कार्यालय बनना है वहां पर तालाब है। निगम ने फैसला लिया है कि तालाब को वहां से बंद कर औरंगाबाद में बना दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तालाब को बंद नहीं किया जा सकता। ऐसे में कानूनी राय लेकर ही दोनों जगहों पर निगम के रुपये खर्च किए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी न हो।