यमुनानगर। महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने वीरवार को लघु सचिवालय में हुई कष्ट निवारण समिति की बैठक में पीडब्ल्यूडी के एसडीओ जसमेर सिंह को आधी अधूरी तैयारी के साथ बैठक में पहुंचने पर फटकार लगाई। वहीं कष्ट निवारण समिति की सदस्य संगीता सिंघल ने भगत सिंह चौक से जगाधरी के अग्रसेन चौक तक सड़क किनारे तीन करोड़ रुपये से बनाए गए नाले से पानी निकासी नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इसकी शिकायत सिंघल ने मंत्री से पिछली जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में की थी, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने जब एसडीओ जसमेर सिंह से नाले की समस्या के समाधान के बारे में पूछा तो उन्होंने मंत्री को बताया कि एक्सईएन छुट्टी पर हैं। उन्हें इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। मंत्री ने कहा कि जब आपको मामले का पता नहीं है तो आधी अधूरी तैयारी के साथ बैठक में क्यों आए हैं। एसडीओ ने कहा कि जेई ने उन्हें एक दिन पहले ही नाले के निर्माण की एमबी दी है। मंत्री ने फिर उनसे सवाल किया कि आखिरी बैठक आठ सितंबर को हुई थी। डेढ़ माह में एमबी क्यों नहीं ली। एसडीओ ने फिर कहा कि जेई नहीं दे रहा है तो वह क्या कर सकते हैं। मंत्री ने एसडीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि जेई क्या आपसे बड़ा है। ऐसी बहानेबाजी ठीक नहीं है।
इस पर एसडीओ ने मंत्री को बताया कि संगीता सिंघल नाले पर हुए खर्च का हिसाब किताब मांगती हैं। वहीं सिंघल ने मंत्री व अधिकारियों के सामने एसडीओ को झूठा बताया। इसी बीच डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने एसडीओ से कहा कि यदि जेई एमबी नहीं दे रहा था तो उसके खिलाफ आपने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई? एक सरकारी दस्तावेज क्यों नहीं दिया जा रहा। यदि एफआईआर कराई होती तो पांच मिनट में आपको एमबी मिल गई होती। मंत्री ने एसडीओ से इस शिकायत पर ठीक से कार्रवाई करने को कहा और डीसी से फीडबैक देने को कहा।
नाले में पानी की निकासी नहीं होने और इसकी सफाई को लेकर संगीता सिंघल व एसडीओ जसमेर सिंह के बीच काफी देर तक बहस हुई। ज्ञात हो भगत सिंह चौक से लेकर जगाधरी में अग्रसेन चौक तक सड़क किनारे नाला पीडब्ल्यूडी ने बनाया था। परंतु इसमें पानी की निकासी नहीं होती। हालांकि सफाई का कार्य नगर निगम कराता है। संगीता सिंघल का आरोप है कि इस नाले के निर्माण में लापरवाही बरती गई है। बिना लेवल के नाला बनाने का आरोप है। जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद सिंघल ने इस मामले को जोर शोर से उठाया।
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डीसी ने सभी अधिकारियों को दी नसीहत
कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायकर्ताओं ने अधिकारियों पर आरटीआई का जवाब नहीं देने का भी आरोप लगाया। लोगों ने कहा कि एक-डेढ़ साल बाद भी आरटीआई नहीं मिलती है। यहां तक की अपील करने के बाद भी आरटीआई का जवाब देना अधिकारी मुनासिब नहीं समझते। जिस पर डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बैठक में मौजूद सभी विभागाें के अधिकारियों से कहा कि आरटीआई को सभी गंभीरता से लें। सरकार ने आरटीआई का जवाब देने के लिए 30 दिन व अधिकतम पांच दिन और निर्धारित कर रखे हैं। ऐसा नहीं है कि जवाब 30वें दिन ही देना है। जवाब आधे घंटे में भी दिया जा सकता है। सरकारी रिकॉर्ड जनता के लिए है। इसमें कुछ भी छिपा नहीं है। यदि जवाब नहीं मिल रहा है तो लोग उनके पास अपील करें। तुरंत उसका जवाब दिया जाएगा।
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कब्जा करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश
खुंडेवाला गांव के दुष्यंत ने मंत्री को शिकायत दी कि कन्हैया साहिब चौक से कमानी चौक तक दाई तरफ बनी दुकानों के पीछे की गली 60 फीट चौड़ी है। परंतु अवैध कब्जों के कारण यह केवल 15 फीट ही रह गई है। नगर निगम के अधिकारियों ने अवैध कब्जा करने वाले 24 में से आठ लोगों द्वारा कोर्ट से स्टे ली होने की बात कह कर मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया। जिस पर डीसी मनोज कुमार ने पूछा कि जब वर्ष 2019 में अतिरिक्त सिविल जज ने कब्जे हटाने के आदेश दिए थे तो तब से अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। कब्जा करने वालों को नोटिस क्यों दिए गए। डीसी ने नगर निगम के डीएमसी से कहा कि जिन आठ लोगों ने कोर्ट में केस कर रखा है उनसे कब्जा मुक्त कराने के लिए नगर निगम अपने खर्च पर केस लड़े। वहीं जो 16 लोग बचे हैं ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करके उनसे कब्जा छुड़ाया जाए।