Maya will set an example for women empowerment, will run e-rickshaw on her own roads
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यमुनानगर। जिले की सड़कों पर अब महिलाएं भी ई-रिक्शा चलाते हुए दिखेंगी। वह ई-रिक्शा में बिठाकर दैनिक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करेंगी। आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ई-रिक्शा के साथ सड़क पर उतरेगी रादौर के गांव भागू माजरा की 31 वर्षीय माया देवी।
माया देवी व गांव भगवानगढ़ की सुमन को सरकार की तरफ से हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दो ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएंगे। एक ई-रिक्शा को तो खुद माया चलाएंगी जबकि दूसरे को सुमन के पति कंवरभान सिंह चलाएंगे। माया सड़क पर रिक्शा चलाना निश्चित तौर पर महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल बनेगा।
माया के पास बाइक चलाने का अनुभव
माया के पास बाइक चलाने का अनुभव है। कई बार उन्हें बाइक चलाते हुए देखा गया है। इसलिए माया देवी ने निर्णय लिया है कि जो ई-रिक्शा सरकार की तरफ से उसे दी जाएगी उसे पति नहीं बल्कि वह खुद चलाएंगी। माया के पति मजदूरी करते हैं। वह पहले निगम क्षेत्र में कूड़ा लिफ्टिंग में कार्यरत थे। परंतु नौकरी छूटने के बाद अब मजदूरी करते हैं। उनके पास एक बेटा व एक बेटी है। जबकि सुमन के पति इलेक्ट्रिीशियन की दुकान पर कार्यरत हैं।
बिना ब्याज के लौटानी होगी ई-रिक्शा की राशि
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर राजकुमारी ने बताया कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत माया व सुमन को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया है। एक रिक्शा की कीमत डेढ़ लाख रुपये है। उन्हें यह राशि बिना ब्याज के 2500 रुपये की दर से 60 किस्तों में वापस लौटानी होगी। उन्होंने बताया कि माया तकदीर महिला स्वयं सहायता तथा सुमन उमंग महिला स्वयं सहायता के नाम से समूह चलाती हैं। दोनों काफी समय से समूह चला रही हैं। उनका लेनदेन भी ठीक है। उनके पास 10 महिलाओं के आवेदन आए थे। जिनमें से ग्रेडिंग के आधार पर माया व सुमन का चयन ई-रिक्शा के लिए किया गया है। रिक्शा चलाकर वह अपने परिवार का गुजर बसर आसानी से कर सकेंगी। एजेंसी की तरफ से रिक्शा शाम तक उपलब्ध करा दी जाएगी।
महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं : माया
माया देवी का कहना है कि महिलाएं पुरुषों न तो पहले कम थी और न ही अब हैं। महिला पुरुष के बराबर काम करती है। यही सोच कर उसने खुद ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लिया। अब पति-पत्नी दोनों काम करेंगे तो परिवार का गुजारा अच्छे से हो सकेगा। वह अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दिला सकेंगे। जब महिलाएं बैंक व अन्य कार्यालयों में कंप्यूटर चला सकती हैं तो सड़क पर ई-रिक्शा या ऑटो चलाने में कोई शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए।