संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कपालमोचन प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है। यह वह स्थल जहां पुराणों में लिखित तीनों लोकों के पाप से मुक्ति दिलाने वाला स्थल। वहीं सोमवार को शाही स्नान के साथ मेले का शुभारंभ होगा। आस्था के इस सैलाब में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है।
पंजाब व अन्य प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भोर पहर पंजभीखी स्नान करेंगे। पहले दिन करीब 30 हजार श्रद्धालुओं की डुबकी लगाने का अनुमान है। वहीं रविवार शाम तक मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान कर धार्मिक स्थलों की पूजा अर्चना व दान किया। गऊ-बच्छा घाट पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ जुटने लगी है।
वहींकपालमोचन में तीनों सरोवरों पर सुरक्षा के लिहाज से गोताखोरों एवं तैराकों की ड्यूटी लगाई गई हैं। 24 घंटे बारी-बारी से अपनी ड्यूटी देंगे। घाटों एवं पूरे मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को बराबर रूप से चुस्त दुरुस्त रखने के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। प्रशासन ने मेला में पधारने वाले लाखों यात्रियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बनाने के लिए मेला प्रशासन को अपना सहयोग दें व गंदगी न फैलाएं तथा पवित्र सरोवरों के जल की पवित्रता को बनाए रखें।
कपालमोचन तीर्थ में प्राचीन काल से आस्था का केंद्र रहा है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर तो यहां जन सैलाब उमड़ पड़ता है। यहां की चमत्कारी शक्तियों की ख्याति सम्राट अकबर के काल में भी रही है। इस पवित्र स्थल पर हर धर्म के लोग अपनी मुरादें लेकर आते है। गुरु गोबिंद सिंह, बाबा बंदा सिंह बैरागी सहित सम्राट अकबर ने भी अपनी आस्था प्रकट करने यहां पहुंचे थे।
यहां संत से मिलने पहुंचे थे सम्राट अकबर
ऐतिहासिक कपालमोचन तीर्थ के सबसे प्राचीन डेरा राम मंदिर के महंत बालक दास का कहना है कि इस तीर्थ पर सम्राट अकबर आए थे। उन्होंने बताया कपालमोचन में अब से 432 वर्ष पूर्व हिजरी सन 987 में उनके आने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म त्याग कर मुसलमान बने लोगों के द्वारा डेरे के साधुओं को माफी के रूप में सैकड़ों बीघा जमीन दान में दी गई थी। शास्त्रों के अनुसार यह मशहूर है कि साढौरा के परगना के काजी फीमूद्दीन इस क्षेत्र में सम्राट अकबर के सामंत थे। काजी निस्तान थे और संत की शक्तियों से प्रभावित होकर यहां पहुंचे थे। संत ने अपने चारों ओर एक लक्ष्मण रेखा रखी थी, जिससे दूसरा आदमी उन्हें देख नही सकता था। काजी काफी प्रयास करने के बाद संत से मिलने के लिए कामयाब हो पाए थे। उनके आशीर्वाद से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुइ थी। तब काजी ने संत के बारे में अकबर को जानकारी दी। इसके बाद सम्राट अकबर स्वयं यहां आकर संत से मिले और उनका आशीर्वाद लिया। कपालमोचन सिंधु वन में 360 तीर्थ होने के प्रमाण यहां के विभिन्न गांवों में मौजूद हैं।
मॉक ड्रिल मिली खामियां दूर करने के निर्देश
बिलासपुर। महर्षि वेद व्यास की कर्मस्थली के नजदीक लगने वाले ऐतिहासिक राज्यस्तरीय कपाल मोचन मेले के प्रबंधों का जायजा लेने के लिए मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान डीसी पार्थ गुप्ता ने जहां-जहां खामियां पाईं, उन्हें तुरंत दूर करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मेले में लगाई गई प्रदर्शनी का भी उन्होंने अवलोकन किया और उनके बारे में जानकारी ली। डीसी ने बताया कि कपालमोचन मेले व प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर तीन बजे राजस्व विभाग हरियाणा के वित्तायुक्त संजीव कौशल करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी पूरी श्रद्धा से अपनी ड्यूटी करें।
मेला प्रशासक जसपाल सिंह गिल ने बताया कि मेले में यात्रियों की सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रबंध पुलिस विभाग द्वारा किए गए हैं। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सुनिश्चित करें कि मेले के दिनों में बिजली की सप्लाई में कोई बाधा न आए और इसके लिए आवश्यकतानुसार जनरेटरों का भी प्रबंध भी किया गया है।
डीसी पार्थ गुप्ता ने कहा कि कपाल मोचन मेले का समापन 19 नवंबर को होगा और मेला में ड्यूटी पर तैनात सभी अधिकारी व कर्मचारी 20 नवंबर तक अपनी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे व ड्यूटी में कोई कोताही सहन नहीं की जाएगी।
वहीं जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी देवेंद्र शर्मा की देखरेख में मेला कपाल मोचन में स्थापित सूचना प्रसारण केंद्र ने अपना कार्य शुरू कर दिया है, जिसका दूरभाष नंबर-01735-296210 है। प्रशासनिक खंड का दूरभाष नंबर-01735-296101, पुलिस कंट्रोल रूम दूरभाष नंबर-01735-296209 तथा कपाल मोचन आदिबद्री श्राइन बोर्ड कार्यालय का दूरभाष नंबर-01735-296207 है। डीसी ने मेला में आने वाले यात्रियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कोविड-19 के नियमों की पालन करें।