माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। जिले में बुखार के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार के पीड़ित मरीजों की भीड़ है। अकेले सिविल अस्पताल में ही रोजना 50 से 60 मरीज बुखार के आ रहे हैं।
खास बात ये है कि मरीजों में डेंगू से मिलते जुलते लक्षण मिल रहे हैं और इनके तेजी से प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं। बुखार के चलते चार लोगों की मौत भी हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने जिले में इस सीजन अब तक केवल 42 डेंगू के मरीज मिलने की बात कही है। वहीं किसी की मौत होने की पुष्टि नहीं की है। सिविल अस्पताल में फिजिशियन के पास रोजाना पांच सौ से छह सौ मरीजों की ओपीडी आ रही है। जिसमें से 15 से 20 फीसदी मरीज बुखार के हैं। वहीं निजी अस्पतालों की बात करें तो यह आंकड़ा दो गुना हो जाता है।
जिले में इस साल जनवरी से सितंबर माह तक कुल 82015 लोगों की मलेरिया जांच की गई है। जिसमें मात्र चार ही मलेरिया संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा 18 से 30 सितंबर तक किए गए रैपिड फीवर सर्वे में कुल 7224 लोगों के नमूने लिए गए. जिसमें से मात्र एक ही संक्रमित मिला। वहीं विभाग ने अभी तक संदिग्ध मानकर 846 लोगों की डेंगू जांच की है, जिसमें 42 संक्रमित मिले हैं। अभी 217 लोगों की रिपोर्ट आनी बाकी है।
बकरी के दूध की मांग बढ़ी
शहर में इन दिनों अचानक बकरी के दूध की मांग बढ़ गई है। पहले बकरी का दूध 50 से 60 रुपये प्रति लीटर में मिल जाता था। वहीं अब यह 200 से 300 रुपये प्रति लीटर में भी नहीं मिल रहा। लोगों का कहना है कि प्लेटलेट्स बढ़ाने में बकरी का दूध काफी कारगर है। वहीं, इसे आयुर्वेदिक डॉक्टर भी सही मानते हैं। एलोपैथिक डॉक्टरों का कहना है कि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि बकरी के दूध से प्लेटलेट्स बढ़ जाते हैं। लोग घरेलू उपचार पर भी जोर दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि पपीते के पत्ते और बकरी के दूध का इस्तेमाल प्लेटलेट्स बढ़ाने में कारगर है। लोग पपीते की पत्तियों से बनी टैबलेट भी खरीद रहे हैं।
डेंगू मलेरिया को लेकर विभाग अलर्ट
यमुनानगर। मलेरिया व डेंगू के खात्मे को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है। डीसी पार्थ गुप्ता ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। एक जगह पर पानी को जमा न होने दें। उन्होंने बताया कि मच्छर ठहरे हुए पानी में अंडे देते हैं, जिससे मलेरिया व डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की बढ़ोतरी तेजी से होती है। मलेरिया उन्मूलन की टीम ठहरे हुए पानी में काला तेल और दवा का छिड़काव कर रही है। घर-घर जाकर मच्छर के लारवा की जांच की जा रही है।
एक स्वस्थ मनुष्य में आमतौर पर डेढ़ लाख से 5 लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं। इनके कम होने पर घबराने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि इलाज कराना चाहिए। प्लेटलेट्स तेजी से कम होते हैं, तो शरीर में चकत्ते पड़ने लगते हैं। वहीं, शरीर के किसी अंग से खून बहने, बुखार, किडनी और लीवर में दिक्कत होने लगे तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती है। - डॉ. वागिश गुटेन, जिला मलेरिया अधिकारी